
कानपूर। 18 जुलाई को कानपूर के बिरसिंहपुर की रिंकी मिश्रा अपनी परेशानी बताने के लिए करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर घाटमपुर तहसील पहुंची थी। संपूर्ण समाधान दिवस में उसने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने अपनी समस्या रखी। पति की मौत के बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी उठा रही रिंकी के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। शनिवार को हालात कुछ अलग थे। इस बार रिंकी को अपनी समस्या लेकर कहीं जाना नहीं पड़ा। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह खुद उसके घर पहुंचे और परिवार का हाल जाना।
रिंकी के पति की करीब 10 साल पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद दोनों बेटियों की जिम्मेदारी उसी के ऊपर आ गई। बड़ी बेटी दिव्यांग है, जबकि छोटी बेटी अदिति की पढ़ाई भी पैसों की कमी के चलते प्रभावित हो रही थी। 18 जुलाई को तहसील पहुंची रिंकी ने अपनी स्थिति जिलाधिकारी को बताई थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से परिवार को जरूरी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
डीएम की पहल के बाद जनसहयोग से रिंकी के लिए पक्का मकान बनवाया जा रहा है। मकान की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं और अब लिंटर डालने की तैयारी है। जिलाधिकारी ने शनिवार को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य देखा और परिवार से बातचीत की। रिंकी को अंत्योदय राशन कार्ड, गैस कनेक्शन, निराश्रित महिला पेंशन और आयुष्मान कार्ड का लाभ भी मिला है। उसकी दिव्यांग बेटी का यूनिक आईडी कार्ड भी बन चुका है।
परिवार की मदद के लिए रिंकी को पास के प्राथमिक विद्यालय में रसोइया का काम भी दिया गया है। वहीं छोटी बेटी अदिति का दाखिला पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में कराया गया है। कक्षा सात में पढ़ने वाली अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल किया है। शनिवार को डीएम के घर पहुंचने पर अदिति ने उनसे बातचीत की। उसने कहा कि वह बड़ी होकर डीएम बनना चाहती है और लोगों की मदद करना चाहती है।
18 जुलाई को रिंकी अपनी समस्या लेकर पैदल चलकर उत्तर प्रदेश के कानपूर की घाटमपुर तहसील पहुंची थी। करीब दो महीने बाद जिलाधिकारी खुद उसके घर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने परिवार को मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली और मकान के निर्माण की स्थिति भी देखी। रिंकी के लिए अब पक्का घर बन रहा है, उसे रोजगार मिला है और दोनों बेटियों की पढ़ाई का रास्ता भी खुला है। कुछ समय पहले तक जिस परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती थी, वहां अब हालात पहले से बेहतर नजर आ रहे हैं।
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