मुंबई। दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान (Disha Salian) की मौत का मामला करीब छह साल बाद एक बार फिर जांच के दायरे में है। बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर के आदेश के बाद सीबीआई (SBI) ने मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर नए सिरे से जांच शुरू की है। एफआईआर (FIR) में कई लोगों के नाम जांच के संदर्भ में सामने आए हैं, लेकिन किसी व्यक्ति को केवल एफआईआर में नाम होने के आधार पर आरोपी या दोषी नहीं माना गया है। हाईकोर्ट ने भी कहा था कि पर्याप्त आधार और सामग्री सामने आने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए।
दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर याचिका में उनकी मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता पक्ष के वरिष्ठ वकील नीलेश ओझा ने अदालत में जांच से जुड़े कई बिंदु उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि मामले में प्रत्यक्षदर्शियों, मोबाइल टावर लोकेशन और मूल सीसीटीवी फुटेज से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं। अब इन दावों और साक्ष्यों की जांच सीबीआई को करनी है।
सवाल: छह साल बाद मामला फिर खुला है, जांच में क्या सामने आ सकता है?
जवाब: नीलेश ओझा के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच का रास्ता खुला है। उनका आरोप है कि दिशा की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई और पुलिस जांच के रिकॉर्ड में भी हेरफेर हुआ। उनका कहना है कि सीबीआई स्वतंत्र रूप से जांच करेगी तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
हालांकि, पहले की जांच में मुंबई पुलिस और बाद में गठित एसआईटी ने किसी आपराधिक साजिश या फाउल प्ले के पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही थी। अब सीबीआई को मामले की परिस्थितियों की नए सिरे से जांच करनी है।
सवाल: सीबीआई के सामने आपके मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण तीन साक्ष्य कौन से हैं?
जवाब: ओझा ने तीन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया है। इनमें पहला प्रत्यक्षदर्शी, दूसरा संबंधित लोगों के मोबाइल फोन की टावर लोकेशन और तीसरा मूल सीसीटीवी फुटेज है। उनका दावा है कि इनसे संबंधित सामग्री उनके पास है और इसे सीबीआई को उपलब्ध कराया जा रहा है।
वकील ने दावा किया कि इन साक्ष्यों के आधार पर मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर कम से कम एक व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय करना जांच एजेंसी और आगे की न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
सवाल: सीसीटीवी फुटेज को लेकर क्या दावा है?
जवाब: ओझा का आरोप है कि घटना वाले दिन की सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ हुई या उसका कुछ हिस्सा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने फोरेंसिक रिपोर्ट और अदालत के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि फुटेज किन परिस्थितियों में गायब हुई और इसमें किसकी भूमिका थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी मामले की सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज, घटना के समय और जांच से जुड़े अन्य रिकॉर्ड में विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत ने इन्हीं परिस्थितियों की व्यापक जांच का निर्देश दिया है।
सवाल: आदित्य ठाकरे समेत कुछ लोगों की गिरफ्तारी की मांग क्यों?
जवाब: याचिकाकर्ता पक्ष के वकील का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ प्रथमदृष्टया गंभीर संदेह या साक्ष्य सामने आते हैं, उनसे पूछताछ की जरूरत हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत के समक्ष कस्टोडियल पूछताछ की मांग रखी थी।
सीबीआई की एफआईआर में आदित्य ठाकरे सहित कई प्रमुख नाम जांच के संदर्भ में दर्ज हैं। इनमें उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, एफआईआर में नाम दर्ज होना अपने आप में अपराध सिद्ध होना या किसी व्यक्ति को आरोपी ठहराया जाना नहीं है। सीबीआई को जांच के दौरान संबंधित लोगों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करना है।
अब सीबीआई की जांच पर टिकी नजर
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। उस समय पुलिस ने इसे आत्महत्या माना था। बाद में उनके पिता ने उनकी मौत को लेकर संदेह जताते हुए नए सिरे से जांच की मांग की। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर मामले की सभी परिस्थितियों की जांच करने का निर्देश दिया।
अब सीबीआई को आरोपों, तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच करनी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किन लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई बनती है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved