
नई दिल्ली: कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल उपचुनाव के लिए टीएमसी के बागी गुट डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (TMC-D) को इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) का ‘लिफाफा’ सिंबल कहां तक उचित है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष और बिना भेदभाव के काम करना चाहिए.
कोर्ट ने आगे कहा कि जब इस पर आपत्ति जताई गई है तो फिर उसी चिह्न को क्यों शामिल किया जा रहा है? क्योंकि कुछ महीने पहले ही इसे दूसरी पार्टी ने इस्तेमाल किया था और आपके पास 183 चुनाव चिह्न मौजूद हैं. कोर्ट ने कहा कि आप निष्पक्ष होने के बजाय नियम-कायदे गिना रहे हैं.
इंडियन सेक्युलर फ्रंट ने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से अपील की थी कि वह चुनाव आयोग को टीएमसी के बागी गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न देने से रोके. चुनाव आयोग ने हाल में नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाले ISF को ‘लिफाफा’ की जगह ‘अलमारी’ चिह्न दिया है. आईएसएफ ने 2024 का लोकसभा चुनाव और इस साल अप्रैल में पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव ‘लिफाफा’ चिह्न पर लड़ा था.
चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट पहुंची ISF ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग ने किसी दूसरी पार्टी को यह चिह्न देते समय अपनी शक्तियों का सही और उचित इस्तेमाल किया था, जिस पर कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया.
चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में पार्टी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करने का 17 सितंबर को निर्देश दिया था.
आईएसएफ के वकील विकास भट्टाचार्य ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह आयोग को निर्देश दे कि वह किसी ऐसे चुनाव में किसी अन्य अपंजीकृत पार्टी को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित न करे, जिसमें दोनों पार्टियां चुनाव लड़ रही हों.
अदालत ने चुनाव आयोग के वकील के अनुरोध पर मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी. आज इसी मामले पर हाई कोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई. नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव छह अक्टूबर को निर्धारित हैं, जबकि चुनाव प्रचार चार अक्टूबर को समाप्त होगा. आईएसएफ ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतारा है.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved