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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर हंगामा, नारेबाजी और धक्कामुक्की के बाद कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

September 26, 2026

नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर विधानसभा (Jammu Kashmir Assembly) में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल करने के प्रस्ताव (Proposal) को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने केंद्र शासित प्रदेश को तत्काल और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव सदन में पेश किया। प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्ताव का भी उल्लेख किया गया था। इसी बिंदु को लेकर भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध (Opposition) शुरू कर दिया।

मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्ताव रखे जाने के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उसका स्वागत किया। इसके विपरीत भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव में स्वायत्तता के पुराने प्रस्ताव के उल्लेख पर सवाल उठाए। भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने कहा कि सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की चर्चा की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

विवाद बढ़ने के साथ भाजपा के कई विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। विरोध के दौरान प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ी गईं और नारेबाजी शुरू हो गई। कुछ समय बाद स्थिति धक्कामुक्की और तीखी नोकझोंक तक पहुंच गई। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की।

हंगामा शांत नहीं होने पर अध्यक्ष ने पहले विधानसभा की कार्यवाही 30 मिनट के लिए स्थगित की। कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी विरोध जारी रहा। इसी दौरान भाजपा विधायक विक्रम रंधावा वेल में पहुंचे और एक कुर्सी उठाने की कोशिश की। विधानसभा के मार्शलों ने उन्हें काबू किया और सदन से बाहर निकाल दिया। इसके बाद भी नारेबाजी और विरोध का सिलसिला जारी रहा। आखिरकार कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

प्रस्ताव की प्रस्तावना में वर्ष 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजने का संकल्प भी लिया गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव पेश करते हुए जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग रखी।

इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे को लेकर विरोध जताया। कांग्रेस के सदस्य अपनी सीटों से खड़े हो गए और निर्वाचन आयोग तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में नारेबाजी करने लगे। इस कारण सदन की शुरुआती कार्यवाही में भी विरोध की स्थिति बनी रही।

उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने आश्वासन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया था, जहां नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे। उनके मुताबिक, उस दौरान प्रधानमंत्री ने इसे अपने नाम से जुड़ी गारंटी बताया था। उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि यदि यह वादा किया गया था, तो अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन और विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को पूरा किया जाना चाहिए। इसी मांग को विधानसभा में प्रस्ताव के माध्यम से सामने रखा गया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों के विरोध के चलते सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा।


  • शुक्रवार की कार्यवाही में पूर्ण राज्य के दर्जे से जुड़े प्रस्ताव के अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन आयोग से संबंधित मुद्दा भी प्रमुख रूप से सामने आया। दोनों पक्षों के बीच विरोध और नारेबाजी के कारण विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई और अंत में सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

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