
नई दिल्ली । विदेश मंत्री (External Affairs Minister)एस जयशंकर (S. Jaishankar)ने संयुक्त राष्ट्र महासभा(United Nations General Assembly) के मंच से वैश्विक शांति और कूटनीति (Global Peace and Diplomacy)को लेकर भारत का पक्ष रखा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी के विचार का उल्लेख किया। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर अंकित गांधी के संदेश का संदर्भ देते हुए शांति के रास्ते को लेकर उनकी सोच को सामने रखा। उनके इस उल्लेख पर महासभा के हॉल में तालियां बजने की बात सामने आई है।
जयशंकर ने अपने संबोधन में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के अलग अलग हिस्सों में जारी संघर्षों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। युद्ध और टकराव का प्रभाव खाद्यान्न ईंधन उर्वरक और वित्त जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ता है। उन्होंने विकासशील देशों के सामने मौजूद इन चुनौतियों को 4F संकट के रूप में रेखांकित किया। इसमें Food यानी खाद्यान्न Fuel यानी ईंधन Fertiliser यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त शामिल हैं।
विदेश मंत्री ने रूस यूक्रेन युद्ध के साथ पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना था कि रणभूमि से किसी समस्या का स्थायी समाधान हासिल करना मुश्किल है और देशों के बीच संवाद के जरिए रास्ता तलाशना जरूरी है। यह रुख भारत की उस व्यापक कूटनीतिक स्थिति के अनुरूप है जिसमें बातचीत और कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया जाता रहा है।
जयशंकर ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि दुनिया में जारी संघर्षों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा की आर्थिक कीमत कई विकासशील देशों को चुकानी पड़ रही है। इन देशों के सामने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के साथ वित्तीय दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
विदेश मंत्री ने बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की बात करता रहा है। जयशंकर के संबोधन में भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े मुद्दे सामने आए।
गांधी के विचार का उल्लेख इस भाषण का एक प्रमुख हिस्सा रहा। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर महात्मा गांधी से जुड़ा संदेश शांति और अहिंसा के विचारों को सामने रखता है। जयशंकर ने इसी संदर्भ को वैश्विक परिस्थितियों से जोड़ते हुए शांति के महत्व को रेखांकित किया। उनका संबोधन ऐसे समय हुआ जब कई क्षेत्रों में संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय एजेंडे के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
जयशंकर के भाषण में खाद्य सुरक्षा ऊर्जा सुरक्षा विकासशील देशों की वित्तीय चुनौतियां युद्ध और कूटनीति जैसे कई विषय शामिल रहे। उन्होंने इन समस्याओं से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
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