
ग्वालियर में एक घर जहां आग दिखाई देती है,लेकिन आग लगाने वाला नजर नहीं आता। कभी कपड़ों में आग लगती है,कभी अलमारी के अंदर,कभी सीढ़ियों पर रखे कार्टन में,तो कभी घर के दूसरे हिस्से में रखा सामान अचानक धधक उठता है,एक-दो बार नहीं,पिछले दो दिनों में 15 से 18 बार आग लग चुकी है। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि बंद लोहे की गोदरेज अलमारी के अंदर रखे कपड़ों में भी आग लग गई,आखिर ये आग कैसे लग रही है?कोई शरारत है,कोई रासायनिक प्रक्रिया या फिर इसके पीछे कोई और वजह?,फिलहाल ये आग एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है और परिवार खौफ के साए में जी रहा है।
तस्वीरें ग्वालियर के सिकंदर कंपू स्थित कुम्हारों के मोहल्ले की हैं। जितेंद्र राव थोराट के मकान और घर के सामने स्थित प्लॉट में पिछले दो दिनों से लगातार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। परिवार के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब एक बजे से आग लगने का सिलसिला शुरू हुआ। घर के सामने प्लॉट में गणेश नर्सरी का सामान और प्लास्टिक के गमले रखे थे। इसी सामान में एक के बाद एक करीब 7 से 11 बार अचानक आग लगी। पहले परिवार को लगा कि शायद तेज धूप या किसी की शरारत की वजह से आग लगी होगी, लेकिन इसके बाद जो हुआ,उसने पूरे परिवार को डरा दिया। रविवार को आग ने घर के अंदर दस्तक दे दी।
परिवार की सदस्य यमुना थोराट के मुताबिक, दोपहर करीब एक बजे कमरे में पलंग के नीचे रखे बिस्तर में अचानक आग भड़क उठी। परिवार ने किसी तरह आग बुझाई और बिस्तर को बाहर निकाल दिया। लेकिन करीब दो घंटे बाद बंद लोहे की गोदरेज अलमारी से धुआं निकलने लगा,अलमारी खोली गई तो अंदर रखी साड़ियों और कपड़ों में आग लगी हुई थी। इसके बाद आग लगने का सिलसिला थमा नहीं।शाम करीब चार बजे नीचे गेट के पास रखे सामान में आग लगी, फिर करीब छह बजे ऊपर जीने के पास रखे सामान में आग भड़क उठी।इसके बाद परिवार के मुताबिक हर आधे से एक घंटे के अंतराल में कभी दरवाजे के पीछे, कभी सीढ़ियों पर रखे कार्टन, कभी खूंटी पर टंगे कपड़ों और कभी आंगन में रखे सामान में आग लगती रही। यानी आग की जगह बदलती रही, लेकिन परिवार का डर लगातार बढ़ता गया।
लगातार हो रही इन घटनाओं से घबराए परिवार ने घर में स्पीकर लगाकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। परिवार के सदस्य जितेंद्र का कहना है कि दोपहर एक बजे से लगातार हनुमान चालीसा चलाई जा रही है। परिवार का मानना है कि इसके बाद आग ऊपर के कमरों तक नहीं पहुंची और नीचे ही रुक गई। हालांकि, इस दावे की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। परिवार का कहना है कि शुरुआत में उन्हें किसी हॉट स्पॉट या सामान्य वजह का शक था, लेकिन घर के अंदर अलग-अलग जगहों पर आग लगने के बाद अब वे इसे किसी दैवीय प्रकोप जैसा मान रहे हैं।
लगातार आग लगने की घटनाओं ने परिवार की नींद उड़ा दी है। सुरक्षा के लिए बच्चों की किताबें,कपड़े और घर का सामान तक निकालकर सड़क पर रख दिया गया है। पड़ोसी भी परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं,लेकिन इलाके में डर का माहौल बना हुआ है। डर के बीच रविवार रात करीब डेढ़ बजे परिवार ने गिरवाई थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिसकर्मी करीब तीन घंटे तक मौके पर रहे और परिवार को ढांढस बंधाया। लेकिन पुलिस के लौटने के कुछ ही देर बाद, सोमवार तड़के करीब साढ़े चार बजे फिर बेड के अंदर रखे सामान में आग लग गई। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन घटनाओं के पीछे वजह क्या है? क्या कोई शरारत कर रहा है?,क्या किसी रासायनिक प्रक्रिया की वजह से आग लग रही है? या फिर कोई और कारण है?
फिलहाल इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। परिवार ने प्रशासन, वैज्ञानिक विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों से मौके का निरीक्षण कर आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने की मांग की है। क्योंकि जब एक ही घर में बार-बार… अलग-अलग जगहों पर और कभी बंद अलमारी के अंदर तक आग लगने लगे,तो रहस्य गहराना लाजमी है। ग्वालियर की ये आग अभी बुझ तो रही है, लेकिन इसके पीछे छिपा रहस्य अब भी सुलग रहा है।
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