नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की सूची जारी कर दी है। आयोग के अनुसार, अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या हटाए गए मतदाताओं के नामों की जानकारी सार्वजनिक की गई है। जिन पात्र मतदाताओं का नाम सूची से छूट गया है, वे ऑनलाइन फॉर्म-6 जमा कर इसे दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं की सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट के अलावा संबंधित जिलों के निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। पात्र मतदाता अगर यह पाता है कि उसका नाम मतदाता सूची से छूट गया है, तो वह ऑनलाइन फॉर्म-6 भर सकता है या अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से संपर्क कर सकता है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, जो योग्य मतदाता SIR के दौरान मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, वे ऑनलाइन फॉर्म-6 के माध्यम से नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा वे अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी से संपर्क करके भी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
आयोग ने BLO को यह निर्देश भी दिया है कि वे ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान के प्रयास तेज करें, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से छूटने की आशंका है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने का अवसर उपलब्ध कराना है।
फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने कहा कि आयोग की ओर से लिए गए फैसलों की जांच की जाएगी और यदि कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया गया तो उसे रद्द किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सभी फैसलों की जांच की जाएगी। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किसी बदलाव को अदालत की ओर से मंजूरी नहीं दी गई है। रिकॉर्ड पेश होने के बाद अदालत यह देखेगी कि कथित बदलाव किसने किया है।
फॉर्म-6 वह आवेदन है, जिसके जरिए पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करता है। SIR के दौरान नाम छूट जाने की स्थिति में पात्र मतदाता इसी माध्यम से दोबारा नाम शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्षी दल SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और प्रक्रिया को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
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