
नई दिल्ली । रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (Royal Swedish Academy of Sciences) ने 2026 के भौतिकी नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) के लिए फ्रांसिस हाल्जन (Francis Halzen) के नाम की घोषणा की है। उन्हें दक्षिण ध्रुव स्थित आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में योगदान और खगोलीय मूल (Astronomical Origin) के हाई एनर्जी न्यूट्रिनो (Neutrino) की खोज के लिए यह सम्मान दिया गया है। हाल्ज (Halzen) ने कई दशक पहले यह विचार रखा था कि दक्षिण ध्रुव की बर्फ का इस्तेमाल न्यूट्रिनो (Neutrino) जैसे बेहद मायावी कणों को पकड़ने और उनका अध्ययन (Study) करने के लिए किया जा सकता है।
न्यूट्रिनो ऐसे कण हैं जो पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। इसी वजह से वे बड़ी दूरी तय करते हुए अपनी दिशा और ऊर्जा में बहुत कम बदलाव के साथ पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह विशेषता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन कणों के जरिए ब्रह्मांड के उन हिस्सों की जानकारी हासिल की जा सकती है, जिन्हें प्रकाश या दूसरे संकेतों के माध्यम से समझना मुश्किल होता है।
आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी करीब एक घन किलोमीटर बर्फ में लगाए गए विशाल नेटवर्क के रूप में काम करती है। इसमें बड़ी संख्या में प्रकाश सेंसर लगाए गए हैं। जब कोई न्यूट्रिनो बर्फ के भीतर मौजूद परमाणु नाभिक से टकराता है, तो एक विशेष प्रकार की प्रकाश चमक पैदा हो सकती है। सेंसर इसी चमक को दर्ज करते हैं और उसके आधार पर न्यूट्रिनो की दिशा तथा दूसरी वैज्ञानिक जानकारी का अध्ययन किया जाता है।
फ्रांसिस हाल्जन ने 1988 में दक्षिण ध्रुव पर न्यूट्रिनो का पता लगाने का अपना विचार पहली बार प्रस्तुत किया था। दक्षिण ध्रुव की बर्फ इस प्रयोग के लिए कई कारणों से उपयोगी मानी गई। वहां मौजूद साफ ग्लेशियर बर्फ में प्रकाश सेंसर लगाए जा सकते थे और क्षेत्र भूगर्भीय रूप से भी स्थिर है। हाल्जन के विचार को अन्य वैज्ञानिकों का समर्थन मिला और बाद के वर्षों में बर्फ के भीतर सेंसर लगाने तथा न्यूट्रिनो का पता लगाने के शुरुआती परीक्षण शुरू हुए।
समय के साथ यह परियोजना विकसित होती गई और आइसक्यूब दुनिया की सबसे बड़ी न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी बन गई। इसके माध्यम से वैज्ञानिकों ने हाई एनर्जी वाले खगोलीय न्यूट्रिनो की पहचान और पुष्टि की। ये कण ब्रह्मांड की अत्यंत ऊर्जावान प्रक्रियाओं से जुड़े हैं। वैज्ञानिकों के लिए इनका अध्ययन उन घटनाओं को समझने का नया माध्यम बना, जिनमें बहुत अधिक ऊर्जा पैदा होती है।
ब्रह्मांड में मौजूद कुछ प्राकृतिक स्रोत पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में हासिल की जा सकने वाली ऊर्जा से लाखों गुना अधिक ऊर्जा वाले कण पैदा करते हैं। इन स्रोतों की प्रकृति, उनके स्थान और उनके भीतर चलने वाली प्रक्रियाओं से जुड़े कई सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों के सामने रहे हैं। हाई एनर्जी न्यूट्रिनो इन्हीं वातावरणों से निकलकर पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं और उनके स्रोतों के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।
आइसक्यूब की खोजों ने न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान को एक नए वैज्ञानिक क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाया है। सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल के आसपास होने वाली प्रक्रियाएं और गामा रे बर्स्ट जैसी अत्यधिक ऊर्जावान घटनाओं को समझने में न्यूट्रिनो महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस तरह ब्रह्मांड का अध्ययन अब दृश्य प्रकाश और अन्य तरंगों के साथ न्यूट्रिनो के जरिए भी किया जा रहा है।
हाल्जन के वैज्ञानिक नेतृत्व में दक्षिण ध्रुव जैसी कठिन परिस्थितियों में विशाल ऑब्जर्वेटरी तैयार हुई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग भी मजबूत हुआ। 2026 का भौतिकी नोबेल उनके उस वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सम्मानित करता है, जिसने बर्फ के भीतर मौजूद विशाल प्राकृतिक क्षेत्र को ब्रह्मांडीय कणों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण प्रयोगशाला में बदलने की दिशा दी।
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