
नई दिल्ली: कनाडा की जानी-मानी कवयित्री और लेखिका ऐनी कार्सन (Anne Carson) को साल 2026 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है. गुरुवार को स्वीडिश एकेडमी ने उनके नाम का आधिकारिक ऐलान किया. एकेडमी ने उनके काम की सराहना करते हुए कहा कि क्लासिकल परंपरा के साथ शानदार तालमेल बिठाते हुए समकालीन साहित्य को नए रूप देने और साहसी रचनाओं के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया जा रहा है. इस पुरस्कार के तहत विजेता को 12 मिलियन स्वीडिश क्राउन की सम्मान राशि दी जाती है.
ऐनी कार्सन मूल रूप से कनाडा की कवयित्री और निबंधकार हैं. उनकी लेखनी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह कविता, गद्य, संवाद और अनुवाद को एक साथ मिलाकर एक अनोखी शैली तैयार करती हैं, जो किसी बंधी-बंधाई विधा की सीमा में नहीं सिमटती. वह प्राचीन ग्रीक (यूनानी) साहित्य के अपने बेहतरीन अनुवादों के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं.
ग्रीक साहित्य का गहरा असर उनकी रचनाओं में साफ झलकता है, चाहे वह ओपेरा के संवाद हों, साहित्यिक आलोचना हो या फिर 1998 में आई उनकी चर्चित पद्य-उपन्यास ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड’ . इसके अलावा साल 2019 में आई उनकी परफॉर्मेंस कृति ‘नॉर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय’ उनकी अनोखी शैली का सटीक उदाहरण है, जिसमें उन्होंने यूरीपिड्स के नाटक की ‘हेलेन ऑफ ट्रॉय’ और हॉलीवुड स्टार मर्लिन मुनरो की कहानी को आपस में पिरोया था. इस सम्मान के साथ ही ऐनी कार्सन का नाम अब अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन, एलिस मुनरो और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे दुनिया के दिग्गज साहित्यकारों की सूची में शामिल हो गया है.
डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर 1901 से शुरू हुए इन पुरस्कारों में साहित्य का चयन अक्सर पाठकों और आलोचकों के बीच चर्चा का विषय रहा है. जहां एकेडमी पर लियो टॉल्स्टॉय और वर्जीनिया वुल्फ जैसे दिग्गजों को अनदेखा करने के आरोप लगते रहे हैं, वहीं गैब्रिएल गार्सिया मार्केज़ और डोरिस लेसिंग जैसे लोकप्रिय नामों को चुनकर इसने पाठकों का दायरा बढ़ाने का काम भी किया है. पिछले साल यानी 2025 का यह पुरस्कार हंगरी के प्रसिद्ध लेखक लास्ज़लो क्रास्नाहोर्काई ने जीता था.
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