img-fluid

कार्तिक मास 27 अक्टूबर से होगा शुरू, दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानें पूजा और खानपान के जरूरी नियम

October 10, 2026

नई दिल्ली । हिंदू धर्म (Hinduism) में कार्तिक मास (Kartik Month) को पूजा-पाठ, स्नान और दीपदान के लिए विशेष महत्व (Significance) वाला महीना माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु (Lord Vishnu), मां लक्ष्मी और सूर्य देव और चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से सुबह स्नान और पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि (Prosperity) और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस महीने में तुलसी पूजन (Tulsi Worship) और शाम के समय दीपक जलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस वर्ष कार्तिक मास की शुरुआत 27 अक्टूबर से होने और 24 नवंबर को समाप्त होने की जानकारी दी गई है।

कार्तिक मास से पहले आश्विन महीने के अंतिम दिनों को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। सर्वपितृ अमावस्या के बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है। इसके बाद शारदीय नवरात्र मनाए जाते हैं, जो नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित होते हैं। नवरात्र के बाद दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इन दिनों से ही पूजा-पाठ और खानपान से जुड़े कुछ नियमों का पालन शुरू किया जा सकता है। दीपावली से पहले घर की साफ-सफाई करने की परंपरा है, लेकिन नवरात्र से पहले भी घर को स्वच्छ रखने पर जोर दिया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र और कार्तिक मास के दौरान खानपान में संयम रखना चाहिए। इस अवधि में लहसुन, प्याज, मांसाहार और शराब जैसी तामसिक मानी जाने वाली चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा बैंगन और मूली का सेवन नहीं करने की बात भी कही गई है। इन नियमों को धार्मिक आस्था और परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। कार्तिक मास में विशेष रूप से मछली खाने से बचने की मान्यता है। धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इस महीने भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का संबंध जल से माना जाता है। इसी कारण कार्तिक मास में मछली का सेवन नहीं करने की परंपरा बताई जाती है।

इस महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और पूजा-पाठ करने को दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। श्रद्धालु सुबह मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं और शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जला सकते हैं। तुलसी पूजन को कार्तिक मास की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में गिना जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से तुलसी के पास दीपक जलाने और पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इन परंपराओं का पालन श्रद्धालु अपनी धार्मिक आस्था और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार करते हैं।

शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा भी इस अवधि में महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपदान से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। दीपावली से पहले घर की साफ-सफाई करने के साथ पूजा स्थल और आसपास के स्थानों को स्वच्छ रखने पर भी जोर दिया जाता है। हालांकि, इन धार्मिक उपायों को आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाता है।


  • कार्तिक मास के दौरान मंत्र जाप और ध्यान करने की सलाह भी दी जाती है। नियमित रूप से कुछ समय मंत्रों का जाप करने और ध्यान लगाने से मन को शांति मिलने तथा सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। इस तरह सुबह स्नान, पूजा-पाठ, तुलसी पूजन, दीपदान, स्वच्छता और खानपान में संयम को कार्तिक मास की प्रमुख धार्मिक परंपराओं के रूप में बताया गया है। श्रद्धालु इन नियमों का पालन करके दीपावली और अन्य पर्वों की तैयारी करते हैं।

    Share:

  • 5 दिसंबर 2026 को राहु-केतु का राशि में परिवर्तन,करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में बन सकते हैं नए अवसर

    Sat Oct 10 , 2026
    नई दिल्ली ।साल 2026 के अंत में राहु (Rahu) और केतु (Ketu) का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 5 दिसंबर 2026 को दोनों छाया ग्रह अपनी वर्तमान राशियों (Zodiac Signs) से निकलकर नई राशियों में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं (Astrological Beliefs) के अनुसार, इस बदलाव का असर लोगों के करियर […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved