संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत ने कानून के शासन के मुद्दे पर पाकिस्तान (Pakistan) को कड़ा जवाब दिया है। भारत ने कहा कि जो देश अपने यहां कानून के शासन का पालन सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, उसे दूसरे देशों को इस विषय पर उपदेश देने का अधिकार नहीं है। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में सेना का कानून और शासन व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण है। साथ ही, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और प्रेस की आजादी को लेकर भी सवाल उठाए।
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून के शासन के विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान पाकिस्तान की टिप्पणियों के जवाब में भारत ने अपने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ यानी जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसके अपने हालात कानून के शासन के दावों से मेल नहीं खाते।
आर. मैथिली ने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान जैसा देश कानून के शासन पर उपदेश दे रहा है, जबकि उसका अपना रिकॉर्ड इस व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में प्रभावी रूप से सेना ही तय करती है कि कानून किस तरह लागू होगा।
मैथिली ने कहा कि जो देश अपने सैन्य शासकों को अपनी ही अदालतों के दायरे से बाहर रखता है, उसे संयुक्त राष्ट्र की इस समिति में कानून के शासन पर दूसरों को सीख देने का अधिकार नहीं है।
#IndiaAtUN
Counsellor Mythili R delivered 🇮🇳’s Right of Reply in the Sixth Committee agenda “Rule of Law at National and International Levels” in response to the statement delivered by the representative of Pakistan.
At the @UN, Pakistan lectures others on the rule of law. Yet at home, the Army is the rule, and the Army is the law.
Judicial independence undermined, civilians tried in military courts, political opposition suppressed.
Our message to Pakistan: Listen to your people.
@MEAIndia @PMOIndia @IndianDiplomacy @PIB_India @airnewsalerts @DDNewslive
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) October 11, 2026
उन्होंने पाकिस्तान के 26वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया और इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए बड़ा झटका बताया। उनके अनुसार, इस संशोधन से पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था की संरचना और कामकाज में व्यापक संस्थागत बदलावों का रास्ता खुला है। भारत ने इस संदर्भ में कानून के शासन और मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में रखे जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में किसी भी सरकार को अपना निर्वाचित कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया और एक पूर्व प्रधानमंत्री को मनमाने ढंग से जेल में रखा गया है।
मैथिली ने दावा किया कि इमरान खान को चिकित्सा उपचार से भी वंचित किया जा रहा है, जो उनकी अपनी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां कानून के शासन के दावों पर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने पाकिस्तान पर एक लोकप्रिय राजनीतिक पार्टी को चुनाव लड़ने से रोकने, सैन्य अदालतों के माध्यम से आम नागरिकों को सजा देने और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की आवाज दबाने के आरोप भी लगाए। मैथिली ने कहा कि पाकिस्तान को अपने लोगों की आवाज सुननी चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दे पर भी निशाना साधा। मैथिली ने कहा कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर पाकिस्तान की टिप्पणियां उसके अपने रिकॉर्ड से ध्यान हटाने की कोशिश हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। मैथिली ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद से उसकी आबादी में अल्पसंख्यकों का प्रतिशत लगातार घटा है।
भारत की ओर से इन मुद्दों को उठाते हुए पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड और कानून के शासन से जुड़े दावों के बीच विरोधाभास को रेखांकित करने की कोशिश की गई।
मैथिली ने पाकिस्तान में विदेशी मीडिया के लिए लागू नए दिशानिर्देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन नियमों के तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर किसी भी तरह के काम के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेना जरूरी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब विदेशी मीडिया की गतिविधियों पर इस तरह की शर्तें लागू हों, तो ऐसे देश में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी प्रेस की स्वतंत्रता की स्थिति कैसी होगी।
भारत ने इन टिप्पणियों के माध्यम से पाकिस्तान में मीडिया की आजादी, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया। संयुक्त राष्ट्र की छठी समिति में हुई इस बहस के दौरान दोनों देशों के बीच कानून के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर मतभेद एक बार फिर सामने आए।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved