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शांति कराने निकले पाकिस्तान की ईरान ने उड़ाई खिल्ली, मध्यस्थता की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

October 12, 2026

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच जारी युद्ध के बीच शांति स्थापित कराने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान को ईरान (Pakistan to Iran) की ओर से तीखे तंज का सामना करना पड़ा है। ईरान के एक वरिष्ठ सांसद ने पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस्लामाबाद की विदेश नीति पर अमेरिका का प्रभाव है। उन्होंने पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका पर भी संदेह जताया। इस बयान से दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर कुछ समय तक हमले रोकने की घोषणा के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री माइन्स से जहाजों को खतरा होने की खबरें भी सामने आई हैं। इसी बीच एक तेल टैंकर के माइन्स की चपेट में आने की सूचना ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे माहौल में पाकिस्तान की शांति पहल पर ईरान की ओर से सवाल उठाए जाना उसकी मध्यस्थता की कोशिशों के लिए चुनौती माना जा रहा है।


  • ईरानी सांसद ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

    न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सांसद मोहसेन जंगनेह ने इस्लामाबाद की शांति स्थापित करने की कोशिशों पर तंज कसते हुए उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की विदेश नीति पर अमेरिका का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके बयान का आशय यह था कि जो देश खुद अमेरिकी प्रभाव में काम करता है, उसकी मध्यस्थता पर भरोसा करना मुश्किल हो सकता है।

    पाकिस्तान इससे पहले भी क्षेत्रीय विवादों में अपनी भूमिका को लेकर आलोचना का सामना करता रहा है। हालांकि, ईरानी सांसद की ताजा टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक भरोसे को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है।

    ‘पाकिस्तान के ट्वीट भी अमेरिकी लिखते हैं’

    जंगनेह ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनके ट्वीट भी अमेरिकी लिखते हैं। उन्होंने एक ऐसे पोस्ट की ओर इशारा किया, जिसे लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए थे।

    रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित पोस्ट की भाषा और उसके अंत में लिखी गई एक पंक्ति को लेकर आलोचना हुई थी। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की राजनीतिक और कूटनीतिक स्वतंत्रता पर तंज कसे गए थे। हालांकि, ट्वीट अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लिखे जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    ईरान ने अफगानिस्तान को बताया भरोसेमंद दोस्त

    पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाने के साथ ही ईरानी सांसद ने अफगानिस्तान के साथ संबंधों की सराहना की। उन्होंने दोनों देशों को भरोसेमंद क्षेत्रीय सहयोगी बताया और कहा कि उनके बीच संबंधों में लगातार सुधार हो रहा है।

    इस बयान को पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ ईरान के संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। क्षेत्रीय राजनीति में भरोसेमंद साझेदारों की तलाश और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    ट्रंप के करीब आने की पाकिस्तान की कोशिशें भी चर्चा में

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अमेरिकी नेतृत्व के साथ नजदीकी बढ़ाने की कोशिशें चर्चा में रही हैं। पाकिस्तान की ओर से ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने और उनकी पहल से जुड़े मंचों में भागीदारी जैसे कदम भी उठाए गए।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अवसर मिलने को भी इसी कूटनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा गया। हालांकि, ईरान की ओर से पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने से इस भूमिका को लेकर संदेह पैदा हुआ है।

    तेहरान और इस्लामाबाद के बीच बढ़ता अविश्वास

    विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान की ओर से आ रहे ऐसे बयान तेहरान और इस्लामाबाद के बीच भरोसे की कमी को उजागर करते हैं। पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाले देश के रूप में पेश करना चाहता है, लेकिन उसकी कूटनीतिक स्वतंत्रता पर उठने वाले सवाल इस कोशिश को मुश्किल बना सकते हैं।

    अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान किसी भी मध्यस्थ के लिए दोनों पक्षों का विश्वास हासिल करना महत्वपूर्ण है। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह दोनों देशों के साथ संवाद बनाए रखते हुए अपनी निष्पक्षता को किस तरह साबित कर पाता है।

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