
भिया के भरोसे रह गए क्रिकेटप्रेमी
इंदौर में क्रिकेट मैच हो और तुलसी भिया के यहां फ्री टिकट लेने वालों की कतार न लगे तो फिर बात कहां बनती है। भिया की महाराज से नजदीकी का फायदा अकसर भिया के आसपास घूमने वाले प_े उठाते हैं। और हो भी क्यों न, एक तरह से तुलसी भिया इंदौर में शेडो महाराज ही हैं। खैर, कल इंदौर में इंडिया-वेस्टइंडीज का टी-20 मैच हुआ। मैच के फ्री टिकटों के लिए मारामारी शुरू हुई। हर किसी को भिया से आशा थी, लेकिन इस बार कई आशावादियों को निराश होना पड़ा। भिया के प_ों ने कह दिया कि इस बार कम टिकट मिले हैं, लेकिन बताने वाले बता रहे हैं कि जनप्रतिनिधियों को एमपीसीए ने 50-50 टिकट के बंडल दिए थे, जिन्हें अपने करीबियों में बांट दिया गया। भिया के पास ऊपर से जो टिकट आए थे वे उनके परिवारजनों ने अपने लोगों को बांट दिए और कई खाली हाथ रह गए, जो कह रहे हैं कि भिया ने हमारे साथ चोट कर दी।
विपिन को आखिर लड़ना कहां से है?
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े संगठन चलाने के साथ-साथ विधायक चुनाव की तैयारी भी कर रहे हैं। अभी तक तय नहीं हुआ है कि विपिन को कहां से लड़ना है, लेकिन विपिन बाबू की पूरी निगाह सांवेर सीट पर है और वे वहां जाने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। सांवेर के शहरी क्षेत्र में जहां भी राजनीतिक गतिविधि होती है वे पहुंच जाते हैं। उनकी यही सक्रियता साबित तो कर रही है कि वे सांवेर से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पार्टी ने अगर यहां से टिकट नहीं दिया तो फिर किधर जाओगे विपिन बाबू?
कुणाल सोलंकी के पास एक ही मुद्दा
कांग्रेस के पार्षद कुणाल सोलंकी के पास एक ही मुद्दा बचा है और वो है उनके क्षेत्र में आने वाला गंदा पानी। गर्मी के दिनों में उन्होंने अपने क्षेत्र में पानी के लिए आंदोलन किया। भागीरथपुरा कांड हुआ तो बोतल में पानी लेकर फिर आंदोलन किया। लोग कह रहे हैं कि कुणाल हर बार महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पीछे ही पड़े रहते हैं। वैसे सही भी है कि पानी जैसा आसान मुद्दा कहीं न कहीं तो बना हुआ है और अब जब बारिश नहीं हुई है तो यह मुद्दा तो फिर सभी वार्डों में छाने ही वाला है।
कौन था हरिराम, जिसने बिगाड़ा भाजपा का काम
भारतीय जनता पार्टी उसको ढूंढने में लगी है, जिसने सफाईकर्मियों को भड़काया और पार्टी का इतना बड़ा कार्यक्रम बिगाड़ने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। गुप्तचरों का कहना है कि पार्टी के अंदर के ही एक नेता ने सफाईकर्मियों को भड़काया और कहा कि अगर वहां जाओगे तो हो सकता है कि तुम्हारी मांग मंजूर हो जाए। फिर क्या था, सफाईकर्मियों ने हंगामा मचा दिया। वैसे सफाईकर्मियों को वहां कोई उम्मीद तो नजर नहीं आई, लेकिन भाजपा के नेताओं के कान खड़े हो गए। जिस तरह से पुलिस का खुफिया तंत्र फेल हुआ, वैसे ही भाजपा का खुफिया तंत्र भी फेल हो गया और अब उस हरिराम की तलाश की जा रही है, जिसने ये सारा मजमा जुटाने में मदद की थी। काफी हद तक उसका नाम तो पता चल गया है, लेकिन एससी वर्ग का होने के कारण पार्टी उस पर एकदम से हाथ नहीं डालना चाह रही है।
घर को बना लिया भाजपा कार्यालय
इंदौर में भाजपा की मासिक बैठक हुई। जैसा कि होता आया है कि किसी न किसी पदाधिकारी को पदाधिकारियों को सूचना देने की जवाबदारी दी जाती है, सो एक महिला पदाधिकारी को भी जवाबदारी मिली, लेकिन मैडम ने खुद फोन नहीं लगाकर अपने ऑफिस से फोन लगवाए। फोन लगाने वाले ने यह भी कहा कि मैं फलां मैडम के ऑफिस से बोल रहा हूं, आपको बैठक में आना है, जबकि फोन भाजपा कार्यालय के नाम से लगाए जाते हैं न कि व्यक्तिगत रूप से। वैसे बता दें कि मैडम जिस रफ्तार से चल रही हैं, उसे नेता पसंद नहीं कर रहे हंै।
भाजपा की झालर के मास्टर बल्ब
आपने झालर में मास्टर बल्ब का नाम तो सुना होगा, जो लुपझुप करने वाले होते हैं और उनसे ही पूरी झालर भी अपने आप ही लुपझुप होने लगती है। ऐसे मास्टर बल्ब भाजपा में भी हैं, जो केवल झालर में लगाने के काम ही आ रहे हैं, बाकी इनका कोई काम है नहीं। जी हां, ये वही बल्ब हैं, जो कभी कांग्रेस की झालर में लटका करते थे, लेकिन जब से पालाबदल हुआ है, तब से भाजपा की झालर सजा रहे हैं। जब भी भाजपा का कोई कार्यक्रम होता है इन्हें मंच पर दूसरी पंक्ति की जगह मिल जाती है। वैसे एक ने तो अभी बैठक में खाने-पीने का खर्चा भी उठाया।
आखिर कौन हंै वे विधायक पुत्र?
विधायक का बेटा विधायक बनने के सपने देखता है, लेकिन इंदौर के एक विधायक के पुत्र पार्षद बनने के सपने देख रहे हैं। आगामी चुनाव को लेकर उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है और इसी तैयारी को देखते हुए उनके धुर विरोधियों ने उन्हें रोकने की तैयारी भी कर ली है। वैसे इंदौर के इतिहास में यह पहली ही बार होगा, जब विधायक पुत्र पार्षद का चुनाव लड़ेंगे। फिलहाल पुत्र के लिए एक वार्ड का चयन कर लिया गया है। विधायकजी की भी इच्छा है कि पार्षद बनाकर उन्हें एमआईसी के बड़े विभाग में पहुंचा दिया जाए, जहां वे राजनीति का ककहरा भी सीख सकें। फिर अगर विधायकजी भविष्य में सीट खाली करें तो उसका फायदा सीधे उनके पुत्र को ही मिले।
एक चम्मच मक्खन को सुमित मिश्रा 10 रोटी में लगा देते हैं। जब से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने ये बात कही है, तब से इसके कई तरह के मायने निकाले जा रहे हंै और सुमित के विरोधियों ने अभी तक चर्चा का बाजार गर्म कर रखा है।
-संजीव मालवीय
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