
नई दिल्ली। सऊदी अरब (Saudi Arabia) में रियाद (Riyadh) पर हुए सिलसिलेवार हमलों (Attacks) के बाद सार्वजनिक सुरक्षा चेतावनी प्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह रियाद में चार हमलों से पहले आम लोगों के मोबाइल फोन पर कोई सार्वजनिक अलर्ट जारी नहीं किया गया था। इन हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की बात कही गई है।
इस घटनाक्रम के बीच सवाल उठ रहा है कि जब हूती विद्रोहियों के हमलों का खतरा बढ़ रहा था, तब सऊदी अरब की सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली खामोश क्यों रही। इसके उलट, क्षेत्र के कुछ अन्य देशों ने संभावित हमलों से पहले नागरिकों को मोबाइल अलर्ट और सायरन के जरिए सतर्क किया।
मई में शुरू हुई थी चेतावनी प्रणाली
सऊदी अरब ने मई में राष्ट्रीय शुरुआती चेतावनी प्रणाली के जरिए मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों पर संभावित खतरे की सूचना देना शुरू किया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को संभावित सैन्य हमलों के बारे में समय रहते सतर्क करना था। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह हमलों में तेजी आने के बावजूद आम लोगों के लिए यह प्रणाली सक्रिय नहीं दिखाई दी।
इसके विपरीत, कतर का आंतरिक मंत्रालय जुलाई में हुए हमलों समेत कई मौकों पर मोबाइल फोन के जरिए चेतावनी जारी करता रहा। इन संदेशों में नागरिकों को घरों के भीतर रहने और खिड़कियों से दूर रहने की सलाह दी गई थी। बहरीन और कुवैत में भी सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए सतर्क किया जाता रहा है।
बार-बार अलर्ट से लोगों की नींद टूटने की शिकायतें?
रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमलों से पहले एक निजी मीडिया संस्थान ने पश्चिमी सरकारों के अधिकारियों से सऊदी अरब में सार्वजनिक अलर्ट बंद किए जाने के बारे में सवाल किया था। बताया गया कि सऊदी अधिकारियों ने इसकी वजह बार-बार जारी होने वाली चेतावनियों से पैदा होने वाली परेशानी को बताया था। अधिकारियों के अनुसार, कुछ नागरिकों ने शिकायत की थी कि रात में अलर्ट आने से उनकी नींद प्रभावित होती है।
हालांकि, इस बारे में सऊदी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए अलर्ट बंद किए जाने के पीछे बताई गई वजह को फिलहाल मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जा रहा है।
पूर्व अमेरिकी राजदूत माइकल रैटनी ने कहा कि सऊदी अरब सार्वजनिक रूप से लोगों को खतरे की जानकारी देने और देश में सामान्य जनजीवन को बाधित होने से बचाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा था। उनके मुताबिक, इस स्थिति ने हमलों को लेकर लोगों की बेचैनी और बढ़ा दी है।
दूतावासों को भी नहीं मिली थी सबसे घातक हमले की चेतावनी
रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने सोमवार तक रियाद के लिए कोई सार्वजनिक चेतावनी जारी नहीं की गई थी, जबकि शहर को लगभग एक दर्जन बार निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
इस दौरान पश्चिमी देशों के दूतावास अपने कर्मचारियों को आंतरिक मिसाइल और ड्रोन अलर्ट भेजते रहे। ये चेतावनियां अमेरिकी और अन्य पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के साथ सऊदी अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की जाती थीं।
हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को हुए सबसे घातक एयरपोर्ट हमले से पहले दूतावासों को भी कोई चेतावनी नहीं मिली थी। इससे हमलों के खतरे का समय रहते आकलन करने और नागरिकों को सतर्क करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।
सुरक्षा चिंताओं के बीच रियाद में ऊर्जा सम्मेलन
हमलों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बावजूद सऊदी अरब ने सोमवार को रियाद में विश्व पेट्रोलियम काउंसिल एनर्जी कांग्रेस की मेजबानी की। सम्मेलन में ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने जोखिमों को स्वीकार करते हुए कहा कि देश अपनी आर्थिक योजनाओं को पटरी से नहीं उतरने देगा।
उन्होंने सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए लोगों का आभार जताते हुए कहा, “आप जानते हैं कि यह देश सुरक्षित है, और हमारा यह जमावड़ा यह साबित करता है कि हम अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेंगे।”
सऊदी अरब के सामने अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ लोगों को समय पर खतरे की जानकारी देने की चुनौती भी है। सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली को लेकर उठे सवालों पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की सुरक्षा व्यवस्था में संभावित बदलाव पर नजर रहेगी।
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