
सीहोर। सीहोर (Sehore) जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोसमी में आदिवासियों के मकान तोड़े जाने का मामला अब सियासी टकराव के साथ प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी लड़ाई बनता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कड़े ऐतराज के बाद अब उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी पीड़ित परिवारों के बीच पहुंच गए। उन्होंने आदिवासी परिवारों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया और दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि बेघर हुए परिवार तिरपाल में नहीं रहेंगे, उनके मकान उसी जगह बनाए जाएंगे, जहां से उन्हें हटाया गया है। कार्तिकेय की चेतावनी ने इस पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
अधिकारियों को सीधी चेतावनी, पहले हमसे टकराना होगा
सोमवार शाम केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान सीहोर जिले के भेरूंदा क्षेत्र के ग्राम कोसमी पहुंचे। यहां उन्होंने प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि पीड़ित परिवारों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को आदिवासी परिवारों से टकराने से पहले हमारा सामना करना होगा। उनके इस बयान को प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ कड़े राजनीतिक प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है।
जमीन पर बैठकर किया भोजन
कार्तिकेय चौहान ने पीड़ित परिवारों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को दुलारा और परिवारों का दर्द सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें तिरपाल के सहारे जीवन बिताने के लिए मजबूर नहीं होने दिया जाएगा। उनके मुताबिक, प्रभावित परिवारों के मकान उसी स्थान पर बनवाने की पहल की जाएगी, जहां से उन्हें हटाया गया है। इस घोषणा के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
11 अक्तूबर की कार्रवाई से भड़का विवाद
जानकारी के अनुसार, 11 अक्तूबर को कोसमी गांव में प्रशासन और वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़ दिए गए और फसलों को भी नुकसान पहुंचाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया। घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ी और मामला राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया। अब इस कार्रवाई के औचित्य, प्रभावित परिवारों को राहत और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मांगा जवाब
मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर सामने आए घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब और दस्तावेज मांगे हैं। नोटिस मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। आयोग ने निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर आगे कानूनी प्रक्रिया अपनाने की चेतावनी दी है।
अब वादों से आगे कार्रवाई की बारी
कोसमी का मामला अब केवल मकान तोड़े जाने तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर पीड़ित परिवारों को स्थायी आवास और न्याय की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्ष जांच का दबाव बढ़ रहा है। कार्तिकेय चौहान के उसी स्थान पर मकान बनवाने के ऐलान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रभावित परिवारों को राहत कब मिलेगी और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
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