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आतंकवाद की फैक्ट्री बना पाकिस्तान: पड़ोसियों को दहलाने की साजिश अब खुद पर पड़ रही भारी

October 16, 2026

नई दिल्ली। पाकिस्तान (Pakistan) पर अपने पड़ोसी देशों को अस्थिर करने के लिए आतंकवाद (Terrorism) को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं। काठमांडू स्थित डिजिटल मीडिया आउटलेट ‘हमराकुरा’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने जिस आतंकवादी नेटवर्क को अपने रणनीतिक हितों के लिए बढ़ावा दिया, वही अब उसके लिए भी गंभीर सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, अफगानिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसी देश पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी नेटवर्कों को लेकर लगातार चिंता जताते रहे हैं। कभी अफगानिस्तान को आतंकवाद का केंद्र बताने वाला पाकिस्तान अब खुद अफगानिस्तान में आतंकवादियों की कथित घुसपैठ के आरोपों का सामना कर रहा है।

रिपोर्ट में पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने और पड़ोसी देशों में अस्थिरता पैदा करने के लिए प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की सुरक्षा नीति में आतंकवादी नेटवर्कों को कथित तौर पर रणनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा की हैं। हालांकि, रिपोर्ट में किए गए इन दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।



  • अफगानिस्तान में घुसपैठ को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप

    रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों से कथित रूप से समर्थित और प्रशिक्षित आतंकवादियों की सीमा पार घुसपैठ की घटनाओं को लेकर विवाद बढ़ रहा है। तालिबान प्रशासन ने भी अफगानिस्तान के भीतर अशांति फैलाने के लिए इस्लामाबाद की आलोचना की है।

    रिपोर्ट में अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के हवाले से दावा किया गया है कि तालिबान की सेना ने नूरिस्तान में 41 आतंकवादियों को मार गिराया और 62 अन्य को पकड़ लिया। इन आतंकवादियों को आईएसआईएस से जुड़े समूहों का सदस्य बताया गया है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन लोगों ने पाकिस्तानी सेना के कथित प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और सहयोग से अफगानिस्तान में घुसपैठ की कोशिश की थी।

    ये आरोप पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से जारी तनाव को और गंभीर बनाते हैं। दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, आतंकवादी गतिविधियों और एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है।

    हक्कानी नेटवर्क को लेकर अमेरिका भी उठा चुका है सवाल

    पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के कथित संबंधों को लेकर अमेरिका भी पहले गंभीर आरोप लगा चुका है। अमेरिका ने पाकिस्तान पर हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों को अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ हमले करने की अनुमति देने के आरोप लगाए थे।

    अमेरिका के तत्कालीन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलेन ने हक्कानी नेटवर्क को लेकर कहा था कि यह संगठन एक तरह से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की वास्तविक शाखा के रूप में काम करता है।

    यह बयान पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और आतंकवादी संगठनों के बीच कथित संबंधों को लेकर अमेरिकी चिंताओं को दर्शाता है। पाकिस्तान हालांकि आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों से इनकार करता रहा है।

    भारत भी सीमा पार आतंकवाद को लेकर घेरता रहा है पाकिस्तान को

    भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने और देश में आतंकी हमलों को अंजाम देने वाले संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है। भारत ने कई मौकों पर पाकिस्तान से जुड़े तत्वों की कथित भूमिका को लेकर सबूत भी पेश किए हैं।

    रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले का भी उल्लेख किया गया है। इस हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे।

    भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्कों के विरुद्ध कदम के रूप में पेश किया गया। इस घटनाक्रम ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया था।

    ईरान ने भी पाकिस्तान पर लगाए हैं आरोप

    पाकिस्तान के साथ ईरान के संबंधों में भी सीमा पार आतंकवाद एक प्रमुख मुद्दा रहा है। तेहरान ने पाकिस्तान पर ईरान विरोधी सशस्त्र समूहों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। ईरान ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल तत्वों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं।

    सीमा पार सक्रिय सशस्त्र समूहों को लेकर दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनाव बढ़ता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान पर लगे आरोप केवल भारत और अफगानिस्तान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ईरान के साथ उसके सुरक्षा संबंधों पर भी असर डालते रहे हैं।

    यूरोप तक पहुंचने की बात, ISI और लश्कर के संबंधों का भी उल्लेख

    ‘हमराकुरा’ की रिपोर्ट में यूरोप में आतंकवादी हमलों और पाकिस्तान स्थित संगठनों के बीच कथित संबंधों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ शरण एजेंसी (EUAA) ने अपनी सामग्री में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा के बीच मजबूत संबंधों का उल्लेख किया है।

    रिपोर्ट में इन कथित संबंधों को क्षेत्रीय सीमाओं से आगे फैले आतंकवादी नेटवर्क के संदर्भ में पेश किया गया है। हालांकि, यूरोप में हुए विशिष्ट हमलों और पाकिस्तान स्थित संगठनों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का आकलन संबंधित जांच और प्रमाणों के आधार पर ही किया जा सकता है।

    पाकिस्तान के लिए ही मुसीबत बना उसका कथित टेरर इकोसिस्टम

    रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक साधन के रूप में आतंकवादी नेटवर्कों को कथित तौर पर बढ़ावा देने की नीति अंततः पाकिस्तान के लिए भी खतरा बन सकती है। आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए करने के आरोपों के बीच पाकिस्तान खुद भी आतंकवादी हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करता रहा है।

    रिपोर्ट में इस स्थिति को विडंबनापूर्ण बताते हुए कहा गया है कि जिस अफगानिस्तान को पाकिस्तान कभी आतंकवाद का स्रोत बताता था, उसी अफगानिस्तान में अब पाकिस्तानी तत्वों पर आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के आरोप लग रहे हैं।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को कथित समर्थन देने के आरोपों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारत, अफगानिस्तान और ईरान के साथ उसके संबंधों में आतंकवाद एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। रिपोर्ट का तर्क है कि आतंकवादी नेटवर्कों को रणनीतिक नीति का हिस्सा बनाने के कथित प्रयास अंततः अपने ही देश के लिए ‘भस्मासुर’ साबित हो सकते हैं।

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