
नई दिल्ली। यूक्रेन (Ukraine) की सेना ने युद्ध (war) के मैदान में गंभीर रूप से घायल सैनिकों (Injured soldiers) को सुरक्षित निकालने के लिए खास बचाव ड्रोन (Drone) का इस्तेमाल शुरू किया है। सेना की एक विशेष इकाई के मुताबिक, ‘स्टारगेट’ नामक ड्रोन की मदद से पहली बार दो घायल सैनिकों को रूसी सीमा के पास युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें एक 24 वर्षीय जवान भी शामिल है, जिसका पैर बुरी तरह घायल होने के कारण उसका खून बहता रहा और उसे बचाव के लिए दो दिन तक इंतजार करना पड़ा।
पैर का आधा हिस्सा कट गया था, चलकर निकलना मुश्किल
यूक्रेन की 475वीं सेपरेट असॉल्ट रेजिमेंट, जिसे ‘कोड 9.2’ के नाम से भी जाना जाता है, ने सोमवार को इन बचाव अभियानों की जानकारी दी। रेजिमेंट के अनुसार, पिछले सप्ताह दो अलग-अलग अभियानों में स्टारगेट ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इस ड्रोन में एक विशेष बंद कैप्सूल लगा है, जिसके भीतर घायल सैनिक को सुरक्षित ले जाया जा सकता है।
बचाए गए सैनिकों में शामिल 24 वर्षीय जवान पहली टेरिटोरियल डिफेंस ब्रिगेड में तैनात है। उसने बताया कि सुरक्षित निकाले जाने से पहले उसे दो दिनों तक इंतजार करना पड़ा। उसकी चोट इतनी गंभीर थी कि युद्ध के मैदान से करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर बाहर निकलना लगभग असंभव था। उसके पैर का आधा हिस्सा कट गया था और काफी खून बह चुका था। जवान ने कहा कि अगर उसे निकालने के लिए छोटा ड्रोन नहीं पहुंचता, तो उसका बच पाना नामुमकिन था।
लंबी घास में उलझी थीं फाइबर-ऑप्टिक केबल
घायल सैनिक को निकालने के लिए इस्तेमाल किए गए ड्रोन में नारंगी और काले रंग का सिगार के आकार का स्ट्रेचर लगा था। ड्रोन ऐसे मैदान में उतरा, जहां लंबी घास में फाइबर-ऑप्टिक केबल उलझी हुई थीं। घायल जवान और उसके साथी सैनिकों को आशंका थी कि कहीं ड्रोन इन केबलों में फंस न जाए।
हालांकि, ड्रोन ने सफलतापूर्वक घायल सैनिक को सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दिया। इस पूरी उड़ान में 15 मिनट से भी कम समय लगा। इस तरह गंभीर रूप से घायल जवान को ऐसे इलाके से निकाला गया, जहां से खुद पैदल निकलना उसके लिए बेहद मुश्किल था।
कई सप्ताह तक किया गया परीक्षण
475वीं रेजिमेंट के मुताबिक, युद्ध के मैदान में इस्तेमाल से पहले स्टारगेट ड्रोन का कई सप्ताह तक परीक्षण किया गया था। इस तकनीक के जरिए घायल सैनिकों को जोखिम भरे इलाकों से निकालने की क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रेजिमेंट ने बताया कि इस ड्रोन की मदद से बचाए गए दोनों सैनिकों के हाथ-पैरों में गंभीर चोटें आई थीं। वे ‘ग्रे जोन’ में फंसे हुए थे। यह ऐसा क्षेत्र है, जहां युद्ध के दौरान सैनिकों की आवाजाही बेहद जोखिम भरी होती है। यह इलाका रूस की सीमा से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित है।
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