तेहरान। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान (West Asia, America, and Iran) के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों (diplomatic efforts) के बीच सैन्य हलचल (Military activity) भी तेज हो गई है। शुक्रवार को कतर के मध्यस्थों ने तेहरान में 12 घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। इसका मकसद अमेरिका और ईरान को फिर से सीधे बातचीत की मेज पर लाना और क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव को रोकना है। बातचीत शनिवार को कतर की राजधानी दोहा में भी जारी रहने की उम्मीद है। दूसरी ओर, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने पश्चिम एशिया के देशों को 4 नवंबर से ईरान के खिलाफ सीमित लेकिन तेज सैन्य हमलों की आशंका को लेकर सतर्क किया है। यह तारीख अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के अगले दिन की है। इस बीच ईरान के भीतर परमाणु हथियार बनाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को तेहरान में हुई लंबी बैठक के दौरान कतर के मध्यस्थ लगातार व्हाइट हाउस के संपर्क में रहे। एक राजनयिक सूत्र ने बातचीत में सकारात्मक प्रगति होने का दावा किया है।
कतर की कोशिश है कि अमेरिका और ईरान कुछ ऐसे शुरुआती कदम उठाने पर सहमत हो जाएं, जिन्हें दोनों देश अगले कुछ दिनों में लागू कर सकें। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य विवादित मुद्दों पर सीधी बातचीत का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, दोनों देशों की शर्तें समझौते की राह में बड़ी बाधा बनी हुई हैं। अमेरिका चाहता है कि बातचीत दोबारा शुरू होने से पहले ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायत दे। वहीं, ईरान की मांग है कि अमेरिका पहले अपना नौसैनिक प्रतिबंध हटाए, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करे और उसे तेल बेचने की अनुमति दे।
कतर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर समझौते का रास्ता निकालने में जुटा है। इसके तहत ईरान से उन परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को पहुंच देने की अपील की जा रही है, जिन पर पहले बमबारी हुई थी। इसके बदले अमेरिका की ओर से कुछ प्रतिबंधों में राहत देने का प्रस्ताव है।
एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के भीतर परमाणु नीति बदलने की मांग तेज हो गई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को ईरान में जुमे की नमाज के इमाम मोहम्मद-जवाद हज-अली-अकबरी ने अपने भाषण में परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि परमाणु हथियारों का मुद्दा अब ईरान की राष्ट्रीय मांग बन चुका है। उनके मुताबिक, देश के 70 प्रतिशत लोग परमाणु नीति में बदलाव का समर्थन करते हैं। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में किसी सर्वे या आंकड़े का स्रोत नहीं बताया।
हज-अली-अकबरी ने विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से मिलकर इस मुद्दे पर प्रस्ताव तैयार करने तथा अंतिम निर्णय के लिए उसे मोजतबा खामेनेई के पास भेजने की अपील की।
ईरानी संसद के प्रेसीडियम के सदस्य अलीरेजा सलीमी ने भी सोशल मीडिया पर परमाणु नीति बदलने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संसद इस मुद्दे पर तत्काल विधेयक ला सकती है।
सलीमी ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकलने को ईरान का अधिकार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में एक विधेयक संसद के पास मौजूद है।
कूटनीतिक गतिविधियों के बीच इजरायल में अमेरिकी सैन्य विमानों की तैनाती को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है। इजरायल के चैनल-14 की रिपोर्ट के मुताबिक, 80 से ज्यादा अमेरिकी हवाई ईंधन भरने वाले विमान इजरायल में तैनात किए गए हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 48 घंटों के दौरान मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य विमानों की बड़े पैमाने पर आवाजाही हुई। इसमें कम से कम 10 भारी मालवाहक विमान और करीब 80 रिफ्यूलिंग टैंकर शामिल बताए गए हैं।
हवाई ईंधन भरने वाले विमानों की इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी से क्षेत्र में अमेरिकी हवाई सैन्य गतिविधियों के विस्तार का संकेत मिल सकता है। हालांकि, विमानों की वास्तविक संख्या और सभी विमानों के इजरायल पहुंचने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और इजरायल के अधिकारियों ने भी इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इस तरह एक ओर कतर अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान में परमाणु हथियारों की मांग और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।
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