वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच जारी तनाव के बीच एक रिपोर्ट में ईरान के सैन्य खरीद नेटवर्क (America and Iran) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रॉयटर्स की जांच के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के बावजूद ईरान अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान जुटा रहा है। इसके लिए उसने कथित तौर पर पांच हजार से अधिक एजेंसियों का एक गुप्त नेटवर्क तैयार कर रखा है। इस नेटवर्क के जरिए चीन और रूस के अलावा जर्मनी जैसे यूरोपीय देश से भी सैन्य और नागरिक, दोनों तरह के उपयोग में आने वाली सामग्री मंगाई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक इस नेटवर्क के माध्यम से करीब दो अरब डॉलर का कारोबार किया जा चुका है। इसमें भारी वाहन, मिसाइलों के पुर्जे और विस्फोटक सामग्री सहित कई तरह के उपकरण शामिल हैं। इनका इस्तेमाल सीधे सैन्य उद्देश्यों के लिए या आवश्यक बदलाव के बाद किया जा सकता है।
रॉयटर्स की जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क में शामिल एजेंसियों के नाम कथित तौर पर ‘एमओडी’ से शुरू होते हैं। इसे ईरान के रक्षा मंत्रालय का कोड नाम बताया गया है। तेहरान में इनके कार्यालय और ठिकाने भी रक्षा मंत्रालय से जुड़े स्थानों पर बताए गए हैं।
इन एजेंसियों की स्थापना भले ही वर्ष 2013 के आसपास हुई हो, लेकिन आधिकारिक दस्तावेजों में इनकी स्थापना की तारीख 11 फरवरी 1979 दर्ज है। यह वही दिन है, जब ईरान में राजशाही का अंत हुआ और इस्लामी क्रांति के बाद अयातुल्ला खुमैनी ने सत्ता संभाली थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस नेटवर्क को संचालित करने के लिए विदेशी नागरिकों और शेल कंपनियों का सहारा लिया है। इन्हें ट्रस्टी के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ये कथित तौर पर अवैध रूप से बेचे गए ईरानी तेल से होने वाली कमाई का प्रबंधन करते हैं। इसी धन का एक हिस्सा रूस, चीन और जर्मनी सहित दूसरे देशों से सैन्य उपयोग में आने वाली सामग्री खरीदने पर खर्च किया जाता है।
ईरान इन एजेंसियों के जरिए तैयार मिसाइल या ड्रोन सीधे नहीं खरीदता, बल्कि ऐसे उपकरण और कलपुर्जे मंगवाता है, जिन्हें आवश्यक बदलाव के बाद सैन्य उपयोग में लाया जा सकता है।
अमेरिकी वित्त विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मियाद मलेकी ने रॉयटर्स को बताया कि यह नेटवर्क ईरानी तेल की अवैध बिक्री से अपना कारोबार चलाता है। तेल को दूसरे रास्तों से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद उसकी पहचान और मूल देश से जुड़े विवरण बदलकर उसे आगे भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में बड़े टैंकरों के जरिए होर्मुज मार्ग का इस्तेमाल करने के बजाय वैकल्पिक रास्ते अपनाए जाते हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल करना मुश्किल है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अवैध तेल बिक्री से प्राप्त रकम का बड़ा हिस्सा सीधे ईरान नहीं पहुंचता, बल्कि नेटवर्क से जुड़े ट्रस्टी इसे अपने नियंत्रण में रखते हैं।
आयात संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि करीब 97 प्रतिशत खेपों का लेनदेन बिना किसी मुद्रा हस्तांतरण के पूरा किया गया। इसका संभावित अर्थ यह है कि संबंधित पक्षों ने विदेशी बैंकों में उपलब्ध धन का इस्तेमाल कर सामान खरीदा और उसे ईरान भेज दिया। इस तरह ईरान को सीधे अंतरराष्ट्रीय भुगतान किए बिना जरूरी सामग्री हासिल करने में मदद मिली।
रॉयटर्स के मुताबिक, गुप्त एजेंसियों के नेटवर्क के जरिए चीन, रूस और जर्मनी से अलग-अलग तरह के उपकरण और सामग्री ईरान पहुंचाई गई। इसके लिए समुद्री, हवाई और सड़क मार्गों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सामग्रियों ने ईरान को ड्रोन और मिसाइलों का बड़ा भंडार तैयार करने में मदद की।
रिपोर्ट के अनुसार, दस्तावेजों की समीक्षा से पता चला कि रूस से सामान कैस्पियन सागर के रास्ते कार्गो जहाजों के जरिए ईरान पहुंचाया गया। मध्य एशिया से ट्रकों के माध्यम से और चीन से मालवाहक विमानों के जरिए सामग्री भेजी गई।
इसके अलावा, अमेरिका के साथ युद्ध शुरू होने से ठीक पहले ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात से भी करीब 2.7 करोड़ डॉलर का सामान खरीदा था। इस तरह अलग-अलग देशों और परिवहन मार्गों के जरिए ईरान तक सामग्री पहुंचाने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है।
रॉयटर्स की जांच के अनुसार, यह पूरा तंत्र अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी के बीच ईरान की सैन्य खरीद को जारी रखने में मददगार बना हुआ है।
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