img-fluid

“हम इस मुल्क के किरायेदार नहीं बल्कि हिस्सेदार, हमारे बुजुर्गों ने कुर्बानी दी”- महमूद मदनी

October 31, 2026

मेवात। हरियाणा के नूंह, मेवात में जमीयत उलमा-ए-हिंद की मजलिस-ए-मुन्तजिमा का अधिवेशन आयोजित हुआ। आज अधिवेशन का दूसरा दिन है। इस दौरान जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने संबोधन दिया। महमूद मदनी ने तमाम मुद्दों पर अपने विचार रखे।

मदनी ने कहा, “हम लोग एक ऐसे नाजुक वक्त में जमा हुए हैं, जब हमारे मुल्क की डेमोक्रेटिक स्परिट और उसके संविधान को बदलने की और उसकी रूह को मिटाने की कोशिशें हो रही हैं। मुल्क में नफरत की ऐसी फिजा कायम कर दी गई है कि जिसमें न केवल अल्पसंख्यकों, दलितों और मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार, निशाने पर हैं बल्कि खुद रूल्स ऑफ लॉ, इंसाफ का निजाम तार-तार है।”

मदनी ने कहा, “मेवात की सरजमीं पर खड़े होकर हमारा पैगाम मुल्क के तमाम शहरियों के लिए है कि हमारा ताल्लुक इस सरजमीं के साथ है। हमने 1947 के गंभीर दोराहे पर, 2 नेशन थ्योरी को ठुकराकर इस धरती को अपने खून से सींचा है।”

मदनी ने कहा, “इस मिट्टी के सीने पर हमारी कब्रें गवाह हैं कि हमने इस मुल्क को आजादी दिलवाने में अपना सब कुछ न्यौछावर किया है। जो लोग हमें दूसरे दर्जे का नापाक शहरी बनाने की साजिशें रच रहे हैं, याद रखें कि वह खुद इस देश के संविधान, इसके लोकतंत्र, इसकी आजादी के सबसे बड़े गद्दार हैं।”


  • मदनी ने कहा, “सबसे बड़ा सवाल ये है कि आज का हिंदुस्तान किस आईडियोलॉजिकल और संवैधानिक क्राइसिस में धकेल दिया गया है। अल्पसंख्यक, मीर्जिनलाइज्ड ग्रुप्स, दलितों और मुसलमानों के साथ क्या सलूक किया जा रहा है?”

    मदनी ने कहा, “देश में मुसलमानों के लिए हालात तंग करने की कोशिश हो रही हैं। हमें दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की साजिशें की जा रही हैं। आज मैं कहना चाहता हूं कि हम (मुसलमान) इस मुल्क के किरायेदार नहीं बल्कि हिस्सेदार हैं। हम किसी राजनैतिक पार्टी के एहसान से यहां नहीं हैं बल्कि हमारे बुजुर्गो ने इस देश को लेकर कुर्बानी दी है। ये देश हमारा है। मैं पूरे होश में कहना चाहता हूं, अब ये सवाल कानों में गूंजने लगा है। क्या देश में मुसलमान होना जुर्म है?”

    मदनी ने कहा, “हमें नहीं भूलना चाहिए कि हमारे देश का बंटवारा हो चुका है। कुछ लोग बुल़डोजर को ही इंसाफ मानने लगे हैं। बुलडोजर किसी गारे या सीमेंट के घर पर नहीं चलता बल्कि इंसाफ पर चलता है। आज अचानक बहुसंख्यक समाज को झूठा खतरा दिखाया जा रहा है कि वो खतरे में हैं। 100 करोड़ की आबादी अचानक खतरे में आ गई है। ये सरकारें वोट के चककर में ये सब कर रही हैं।”

    मदनी ने कहा, “पहले ये गुमान था कि बयानबाजियों और नफरतों का ये सिलसिला केवल वोट बटोरने का वक्ती हथकंडा है लेकिन आज ये हकीकत सामने आ चुकी है कि मुल्क को धीरे-धीरे एक ऐसी जंग की तरफ धकेला जा रहा है, जिसकी बुनियाद केवल धार्मिक भेदभाव है।” मदनी ने कहा, “एक साल के दौरान मुल्क में नफरती बयानों के 1600 से ज्यादा वेरीफाइड वाकयात सामने आ चुके हैं, जिसमें 87 फीसदी वाकयात में पुलिस ने कार्रवाई तो दूर, एक FIR तक दर्ज नहीं की।”

    Share:

  • क्या जम्मू-कश्मीर में NC से बगावत करने वाले हैं विधायक, 17 MLA ने की प्राइवेट बैठक

    Sat Oct 31 , 2026
    डेस्क। श्रीनगर में कल नेशनल कॉन्फ्रेंस के 17 विधायकों की एक निजी बैठक होने की खबरों के बाद, पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष शौकत मीर ने किसी भी तरह की बगावत के दावों को खारिज कर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के 17 विधायक कुछ मांगों पर चर्चा करने के लिए […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved