नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात अर्नब (cyclone arnab) के बाद अब एक और तूफान मुरासु (Storm Murasu) की गतिविधियां सामने आ रही हैं। इसके आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के तटीय इलाकों की ओर बढ़ने की आशंका जताई गई है। इस बीच चक्रवातों के नामकरण को लेकर भी लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है। आखिर इन तूफानों के नाम कौन तय करता है? अलग-अलग देश नामों की सूची कैसे तैयार करते हैं और अर्नब व मुरासु के बाद आने वाले तूफान का नाम क्या होगा?
दरअसल, चक्रवातों के नामकरण की एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है। इसके तहत संबंधित क्षेत्र के देश पहले से नाम सुझाते हैं और तय क्रम के अनुसार बनने वाले तूफानों को ये नाम दिए जाते हैं।
क्या होते हैं चक्रवात?
चक्रवात यानी साइक्लोन समुद्र के ऊपर कम वायुमंडलीय दबाव वाले क्षेत्र में बनने वाला शक्तिशाली तूफान है। गर्म समुद्री सतह से मिलने वाली ऊर्जा के कारण इसमें तेज हवाएं चलने लगती हैं और हवा का प्रवाह गोलाकार रूप में केंद्र की ओर घूमता है। दुनिया के अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में ऐसे तूफानों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
चक्रवातों की पहचान आसान बनाने और एक ही समय में कई तूफानों को लेकर भ्रम की स्थिति से बचने के लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के तहत नामकरण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए दुनिया के समुद्री क्षेत्रों को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। हर क्षेत्र के सदस्य देश चक्रवातों के लिए नाम सुझाते हैं। इन नामों की सूची तैयार की जाती है और निर्धारित क्रम के अनुसार नए तूफानों को नाम दिया जाता है।
उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण के लिए 13 देश शामिल हैं। इनमें भारत, बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) के पैनल के तहत वर्ष 2020 में इस क्षेत्र के देशों ने नामों की नई सूची तैयार की थी। सभी 13 देशों ने 13-13 नाम सुझाए थे। इसके बाद तय क्रम में इन नामों का इस्तेमाल किया जाता है।
अर्नब, मुरासु और अक्वान किसने सुझाए?
उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में हाल के चक्रवातों के नाम अलग-अलग देशों की ओर से सुझाए गए हैं। अर्नब नाम बांग्लादेश ने दिया है, जबकि मुरासु नाम भारत की ओर से सुझाया गया है। इसके बाद आने वाले चक्रवात का नाम अक्वान होगा, जिसे ईरान ने प्रस्तावित किया है।
नामकरण के लिए क्या हैं नियम?
चक्रवातों के नाम तय करते समय कुछ मानकों का पालन किया जाता है। नाम छोटा, स्पष्ट और आसानी से बोला जाने वाला होना चाहिए। इसके अलावा नाम किसी देश, समुदाय, धर्म, संस्कृति या लिंग के प्रति अपमानजनक अथवा आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए। किसी राजनीतिक या विवादित संदर्भ से जुड़ा नाम भी स्वीकार नहीं किया जाता।
एक बार किसी चक्रवात को नाम दिए जाने के बाद उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में उस नाम का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस व्यवस्था का उद्देश्य तूफानों की पहचान को सरल बनाना और मौसम संबंधी चेतावनियों को आम लोगों तक स्पष्ट रूप से पहुंचाना है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved