यरुशलम। इजरायल में सरकार (Government of Israel) गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने गठबंधन बनाने की कोशिशें छोड़ने और नए चुनाव की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। इजरायली न्यूज चैनल सी14 ने मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू का मानना है कि एकता सरकार बनाने की कोशिशें अब बेकार हो चुकी हैं और इस दिशा में आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं बची है।
बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने नफ्ताली बेनेट के टुगेदर गुट और एविगडोर लिबरमैन की यिसराइल बेयतेनु पार्टी के साथ राजनीतिक समझौते की कोशिशें भी रोक दी हैं। अब उनका ध्यान जनता का समर्थन जुटाने और अपनी राजनीतिक टीम को अगले चुनाव के लिए तैयार करने पर है।
सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह फैसला तब लिया, जब उन्हें लगा कि याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट उनकी अगुवाई वाली एकता सरकार में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हैं। नेतन्याहू के करीबी लोगों का कहना है कि आइजेनकोट से संपर्क साधने की अनौपचारिक कोशिशों की जानकारी बार-बार सार्वजनिक हो रही थी। इससे प्रधानमंत्री की टीम निराश हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में शामिल बिचौलियों की ओर से चर्चाओं की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के कारण समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ गईं। इसके बाद नेतन्याहू के कार्यालय ने गठबंधन बनाने की कोशिशों के बजाय जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
अरब पार्टियों के समर्थन वाली सरकार के खिलाफ अभियान
नेतन्याहू अब अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर किसी भी संभावित सरकार के खिलाफ आक्रामक चुनाव प्रचार करने की तैयारी में हैं। इसमें रा’अम और जॉइंट लिस्ट जैसी पार्टियां शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ऐसी सरकार की वैधता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से उसकी उपयुक्तता पर सवाल उठाने की रणनीति अपना सकते हैं।
उनका चुनावी संदेश यह होगा कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के बीच अरब पार्टियों के समर्थन से बनने वाली सरकार इजरायल के हितों के अनुकूल नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू विशेष रूप से वामपंथी गठबंधनों के खिलाफ प्रचार अभियान तेज करने की तैयारी कर रहे हैं।
संसद में बहुमत से दूर नेतन्याहू का गठबंधन
इजरायल की 120 सदस्यीय नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके धुर-दक्षिणपंथी तथा कट्टर रूढ़िवादी सहयोगियों को 53 सीटें मिली हैं। वहीं, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट को 48 सीटें और अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं।
इन आंकड़ों के अनुसार, किसी भी पक्ष के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। ऐसे में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पाना नेतन्याहू के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
क्या इजरायल में जल्द होंगे नए चुनाव?
गठबंधन की कोशिशों से पीछे हटने और चुनावी अभियान की तैयारी की खबरों ने इजरायल में जल्द चुनाव होने की अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर नए चुनाव की आधिकारिक तारीख की पुष्टि नहीं होती है। फिलहाल नेतन्याहू की प्राथमिकता अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना और संभावित चुनाव में समर्थन जुटाना बताई जा रही है।
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