
भोपाल। कूनो नेशनल पार्क में चीते की शिकार की घटना के बाद अब प्रोजेक्ट चीता की निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से कूनो प्रबंधन में कथित लापरवाही और सुरक्षा संबंधी खामियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा पर वर्ष 2024 में जारी सरकारी नोटिस का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है।
साथ ही तत्कालीन पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) और वर्तमान हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स शुभरंजन सेन की भूमिका की भी जांच की मांग की है। 30 अक्टूबर 2026 को भेजी गई पिछली शिकायत के क्रम में दिए गए इस प्रतिवेदन में दुबे ने 5 सितंबर 2024 को तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक की ओर से जारी दो पत्रों का हवाला दिया है। इनमें पत्र क्रमांक प्रबंध/2024/1/7769 और प्रबंध/2024/7785 शामिल हैं। उनके मुताबिक, इन पत्रों में चीतों की निगरानी और प्रबंधन से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आई थीं।
चीतों के ट्रैकिंग और मेडिकल रजिस्टर नहीं मिलने का दावा
शिकायत में कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान चीतों की व्यक्तिगत ट्रैकिंग और मेडिकल उपचार से संबंधित रजिस्टर संधारित नहीं पाए गए थे। बाड़ों में मौजूद चीतों के लिए 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था थी, लेकिन पार्क के खुले क्षेत्र में घूमने वाले चीतों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजाम नहीं होने की बात भी उठाई गई है। दुबे ने सवाल किया है कि इन कमियों पर जारी निर्देशों के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और संबंधित अधिकारियों ने अनुपालन रिपोर्ट क्यों नहीं दी।
श्योपुर, शिवपुरी और मुरैना से समन्वय की कमी
दुबे ने कूनो प्रबंधन और श्योपुर, शिवपुरी तथा मुरैना के क्षेत्रीय वन मंडलों के बीच संयुक्त निगरानी व्यवस्था कमजोर होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पार्क से बाहर जाने वाले चीतों की लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी संबंधित वन मंडलों तक तत्काल पहुंचनी चाहिए। इसके लिए नियमित बैठकें और साझा मॉनिटरिंग व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों के बीच समन्वय और सैटेलाइट कॉलर सिग्नल ट्रैकिंग के रिकॉर्ड का ऑडिट कराने की मांग की है।
26 गांवों के विस्थापन के बाद भी आवास विकास धीमा
प्रतिवेदन में 26 गांवों के विस्थापन के बाद घास के मैदान विकसित करने की गति पर भी सवाल उठाए गए हैं। दुबे के मुताबिक, दो साल में केवल चार से पांच गांवों के क्षेत्रों में ही यह काम पूरा हो पाया। उन्होंने ट्रैंकुलाइजेशन के दौरान वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत जरूरी अनुमतियों के पालन की भी जांच कराने की मांग की है।
किसानों को मुआवजा देने की व्यवस्था पर सवाल
श्योपुर के ग्रामीण इलाकों में चीतों की आवाजाही से फसल और मवेशियों को नुकसान होने तथा किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। दुबे ने एनटीसीए से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित और पारदर्शी मुआवजा व्यवस्था लागू कराने की मांग की है। उन्होंने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें प्रशासनिक ऑडिट, उत्तम कुमार शर्मा और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच, निगरानी व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करना और किसानों को शीघ्र मुआवजा देना शामिल है। हालांकि, प्रतिवेदन में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
दो साल पहले कमियां सामने आई, लेकिन उन्हें दूर नहीं किया
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि चीतों की सुरक्षा केवल सैटेलाइट कॉलर लगाने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए मजबूत मैदानी निगरानी, वन मंडलों के बीच समन्वय और अधिकारियों की जवाबदेही जरूरी है। वर्ष 2024 में ही सरकारी निरीक्षण में कई कमियां सामने आई थीं। एनटीसीए को दिए प्रतिवेदन में मांग की है कि इन कमियों पर कार्रवाई नहीं होने की भी जांच हो। स्थानीय किसानों को समय पर मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति न बने।
आरोप बेबुनियाद और तथ्य हीन
कूनो नेशनल पार्क के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि मैं किसी के आरोपों पर जवाब देने के लिए नहीं हूं। हम यहां चीतो को बचाने के लिए है ना की मारने के लिए। हम यहां वरिष्ठों के आदेश का पालन करने के लिए हैं। मुझे किसी शिकायत पर कुछ नहीं कहना।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved