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‘बहस के लिए संसद आएं’, SIR पर डिबेट की चुनौती का अमित शाह ने राहुल गांधी को दिया जवाब

November 05, 2026

करनाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। हरियाणा के करनाल में बीजेपी के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी आप पीएम मोदी को बहस की चुनौती देते हैं। अगर आप सच में चर्चा करना चाहते हैं, तो उन्हें पत्र लिखें। हम चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं।” राहुल गांधी ने अभी हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस (डिबेट) की चुनौती दी थी।

अमित शाह ने कहा कि “मैं आपको बताता हूं कि हम यह रैली क्यों निकाल रहे हैं। देश ने मोदी को लगातार तीसरी बार चुना है, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है।” शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी की संस्कृति में ही यह बात शामिल है कि “संसद को काम न करने दिया जाए” और “अराजकता फैलाई जाए।”


  • गृह मंत्री ने कहा कि 2014, 2019 और 2024 में SIR नहीं थी। फिर भी कांग्रेस बुरी तरह चुनाव हार गई। हरियाणा, महाराष्ट्र में कोई SIR नहीं था। फिर भी आप हर जगह हार गए। अब आप दावा कर रहे हैं कि एक करोड़ वोट हटा दिए गए हैं। मैं सीधे राहुल गांधी को चुनौती देना चाहता हूं। अगर आप सच में बहस करना चाहते हैं, तो बस प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिख दें। हम SIR पर चर्चा करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं।

    हमारे यहां कोई भी काम लेने जाता है, तो पूछते हैं कि पहले क्या करते थे? राहुल गांधी से भी जनता पूछती है कि अपना पहले का रिकॉर्ड बताइए। मैं बताता हूं कि 2007 में राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के महासचिव बने, तब कांग्रेस के 1200 विधायक थे। जब ये उपाध्यक्ष बने, तो 900 विधायक रह गए। अध्यक्ष बने, तो इनके विधायकों की संख्या 900 से घटकर 700 रह गई। 2022 में भारत जोड़ो यात्रा निकाली, तो वो और भी कम होकर 600 रह गए। राहुल गांधी, जबसे आप आए हो, कांग्रेस पार्टी के विधायक लगातार कम हो रहे हैं और जबसे मोदी आए हैं, भाजपा के विधायक और सांसद लगातार बढ़ रहे हैं।

    अमित शाह ने कहा, “रेफरी को ही ‘चीटर’ (धोखेबाज़) कह दो, तो हमारी जीत पक्की हो जाएगी…” उन्होंने कहा, “जब हम बच्चे थे, तब हम कबड्डी खेला करते थे। सातवीं कक्षा की हमारी टीम हमेशा चैंपियन बनती थी। लगातार हारने के बाद, नौवीं कक्षा की टीम ने एक बैठक की। उन्हें लगा कि सातवीं कक्षा की टीम जो उनसे उम्र में छोटी थी लगातार जीत रही है, जिससे उनकी अहम (ego) को ठेस पहुंची। इसलिए, उन्होंने तय किया कि सबसे अच्छी रणनीति यह होगी कि रेफरी को ही ‘चीटर’ करार दे दिया जाए। इस तरह, उनकी अपनी जीत पक्की हो जाएगी। लगता है राहुल गांधी ने शायद उन छात्रों की बात सुन ली होगी…”।

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