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खतरनाक है पैंक्रियाटिक अटैक, समय पर इलाज जरूरी

June 20, 2026

  • ग्रेस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. आलोक बंसल ने साझा की अहम जानकारियां

जबलपुर। शहर के जाने माने ग्रेस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. आलोक बंसल ने बताया कि डिस्कनेक्टेड पैंक्रियाटिक डक्ट सिंड्रोम (डीपीडीएस) जब पैंक्रियाटिक अटैक (पैंक्रियाटायटिस) होने पर उसके आस पास नेक्रोटिक कलेक्शन होने पर पैंक्रियाटिक डक्ट बिच में गल कर अलग हो जाता है और पैंक्रियाटिक जूस पेट में और फेफड़ों में लीक होने लगता है, जहां भी ये जूस जाता है उस अंग को डाइजेस्ट करने लगता है। जिससे ह्रदय गति का बढऩा, बुखार आना, भूक न लगना, सांस फूलना, दस्त लगना, वजन कम होते जाना होता है और कभी कभी ऐसे इन्फेक्शन भी हो जाते है। इसलिए समय रहते इस लीकेज को बंद करना जरूरी होता है। लीकेज को बंद करना भी आसान नहीं, सर्जरी से अलग हुए पैंक्रियास को निकलना पड़ता है और बाद में पैंक्रियास की कमी से खाना पचाने में दिक्कत और इन्सुलिन की कमी से डायबिटीज हो जाता है। जीवन भर इन्सुलिन लेने की जरूरत होती है।



  • विगत दिवस डॉ. आलोक बंसल द्वारा एक ऐसे ही मरीज की सफल सर्जरी की गई। जो अब पूरी तरह स्वस्थ्य है। डॉ. आलोक बंसल ने बताया कि 30 वर्षीय मरीज़ रोशन जॉर्ज पैंक्रियाटिक अटैक के साथ अस्पताल पहुंचा, वो डॉ. आलोक बंसल (गैस्ट्रो न्यूरो क्लिनिक जबलपुर)के संपर्क में आया। डॉ बंसल ने उन्हें अपने देख रेख में भर्ती किया उसे 2-3 दिन के इलाज के बाद देखा कि ऑक्सीजन की कमी होने लगी, जो की पैंक्रियाटायटिस के मरीज में आम बात है, पर छाती के एक्स रे में देखा गया की दाए फेफड़ो में 25 प्रतिशत से ज्यादा पानी भरा हुआ जो कि पैंक्रियाटायटिस के मरीजों की तुलना में बिलकुल विपरीत है क्योकि पैंक्रियाटायटिस में ज़्यादातर बाये फेफड़ो में या दोनों तरफ पानी भरता है, लेकिन केवल दाए तरफ बहुत इतना ज्यादा पानी भरना साथ ही पैंक्रियास के हेड पार्ट में नेक्रोटिक कलेक्शन का होना सीधे तौर पर ये दर्शाता है कि पैंक्रियास के हेड पार्ट के नली में लीकेज हो रहा है जो की डिस्कनेक्टेड पैंक्रियाटिक डक्ट सिंड्रोम (डीपीडीएस) में होता है, जोकि एक दुर्लभ और साथ ही जानलेवा स्तिथि भी है। जब उसके पेट में और फेफड़ों में पानी भरने लगा और लगातार बुखार दस्त हो रहे थे क्योंकि पैंक्रियाटिक जूस आंतो न खुल कर पेट में लीक हो रहा था जो भी वो खाता बिना पचे बाहर हो रहा था। इमरजेंसी में फेफड़ो से पानी निकाल कर एंडोस्कोपी से पैंक्रियाटिक ओपनिंग में तार डालने की कोशिश करी गयी और 25-30 कोशिशों के बाद तार पैंक्रियाटिक डक्ट के अलग-अलग हिस्सों को ब्रिज किया और उसमे स्टेंट डाला गया और देखते ही देखते पैंक्रियाटिक जूस आंतों में तेजी से आने लगा, उस समय ही ये अनुमान हो गया था कि ये मरीज अब इस जानलेवा बीमारी से पूरी तरह बच जाएगा और धीरे धीरे फेफड़े और पेट में भरा पानी कम हो गया। पैंक्रियास के हेड में जो नेक्रोटिक कलेक्शन का साइज भी धीरे धीरे नगण्य होने लगा जो पहले लगातार बढ़ ही रहा था। मरीज को ठीक हालत में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

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