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शर्मनाक हकीकत… अंतिम विदाई भी सम्मानजनक नहीं

July 16, 2026

  • चौहानी मुक्तिधाम की बदहाली पर कब जागेंगे जिम्मेदार,जर्जर हो चुकी छतें और सुविधाओं का अकाल

जबलपुर। गढ़ा क्षेत्र का चौहानी मुक्तिधाम शहर का प्रमुख अंतिम संस्कार स्थल है, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। मानसून की पहली बारिश के साथ ही यहाँ की अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आ गई हैं। मुक्तिधाम के अधिकांश शेड क्षतिग्रस्त होकर टूट चुके हैं और कई स्थान पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शोकाकुल परिजनों को बैठने तक की उचित जगह नसीब नहीं हो रही है। इस मुख्य स्थल पर न तो पीने के पानी की कोई व्यवस्था है और न ही धूप-बारिश से बचने के लिए पर्याप्त शेड। परिजनों को मजबूरी में बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। महापौर और नगर निगम प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यह स्थल शहर की अंतिम विदाई का साक्षी बनता है।



  • जर्जर शेड के नीचे अंतिम संस्कार की मजबूरी
    चौहानी मुक्तिधाम के वर्तमान हाल किसी त्रासदी से कम नहीं हैं। बरसात के मौसम में यहाँ का दृश्य और भी भयावह हो जाता है, क्योंकि जर्जर छतों से पानी सीधा चिताओं पर गिरता है, जिससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भारी कठिनाई होती है। दाह संस्कार के लिए बनाए गए शेड अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं और कभी भी ढह सकते हैं। प्रशासन द्वारा लंबे समय से यहाँ कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है। जो कुर्सियां वहां मौजूद हैं, उनके ऊपर भी कोई सुरक्षा कवच या छाया नहीं है, जिसके कारण बारिश में वे भी किसी काम की नहीं रहतीं। प्रशासन की इस उदासीनता का खामियाजा उन परिवारों को भुगतना पड़ रहा है जो पहले ही अपने किसी प्रियजन को खोने के दुख में डूबे होते हैं।

    पानी के लिए भी तरसते हैं शोकाकुल परिजन
    मुक्तिधाम जैसी संवेदनशील जगह पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव होना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। यहाँ आने वाले लोगों को पीने के साफ पानी तक के लिए संघर्ष करना पड़ता है। पीने का पानी उपलब्ध न होने के कारण लोग बाजार से पानी की बोतल या पाउच मंगाने को मजबूर हैं। यह केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि संवेदनाओं का भी अभाव है। यदि अधिकारी और महापौर एक बार खुद मौके पर आकर व्यवस्थाओं का अवलोकन करें, तो उन्हें समझ आएगा कि मरघट की शांति में भी कितनी बड़ी पीड़ा छिपी है। हालांकि नगर निगम के बजट में शमशान के रखरखाव की राशि का उल्लेश जरूर रहता है, लेकिन स्थिति सबके सामने है। आमजन की मांग है कि तत्काल प्रभाव से शेडों की मरम्मत की जाए और परिसर में पेयजल तथा बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि अंतिम विदाई का सफर सम्मानजनक तरीके से पूरा हो सके।

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