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मप्र में बिजली संकट का एआई से निकलेगा समाधान…

July 16, 2026

  • 24 घंटे होगी ग्रिड की स्मार्ट निगरानी, थमेगी अघोषित कटौती

भोपाल। प्रदेश में तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग के बीच बिजली कंपनियां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ग्रिड संचालन को स्मार्ट बनाने की तैयारी में हैं। इस तकनीक के जरिए बिजली की मांग का पहले से अनुमान लगाया जाएगा। इससे समय पर ग्रिड का बेहतर प्रबंधन और तकनीकी खराबियों की समय रहते पहचान संभव होगी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना और अघोषित कटौती की स्थिति को कम करना है।



  • प्रदेश में वर्ष 2018-19 के दौरान अधिकतम बिजली मांग 14,089 मेगावाट थी, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 18,913 मेगावाट तक पहुंच गई। वर्तमान में यह आंकड़ा करीब 20 हजार मेगावाट के आसपास है। ऊर्जा क्षेत्र के अनुमान के अनुसार वर्ष 2027-28 तक अधिकतम मांग 22 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है। बढ़ती जरूरत को देखते हुए बिजली कंपनियां पारंपरिक व्यवस्था के बजाय डिजिटल तकनीकों पर फोकस कर रही हैं।

    ग्रिड पर रहेगी पैनी नजर और एससीएडीए प्रणाली का उपयोग
    एआई से लैस एससीएडीए (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) प्रणाली नियंत्रण केंद्रों को ग्रिड की वास्तविक स्थिति का लगातार आकलन करने में मदद करेगी। इसके जरिए वोल्टेज नियंत्रण, मांग-आपूर्ति संतुलन, आर्थिक डिस्पैच और पीक लोड प्रबंधन जैसे निर्णय अधिक तेजी और सटीकता से लिए जा सकेंगे। इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढऩे की उम्मीद है।

    ट्रांसमिशन लाइनों की निगरानी होगी स्मार्ट और ड्रोन का इस्तेमाल
    मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा भी ड्रोन आधारित निरीक्षण व्यवस्था को और उन्नत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। ्रढ्ढ आधारित इमेज एनालिसिस तकनीक की मदद से ट्रांसमिशन लाइनों, टावरों और उपकरणों में संभावित खराबियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को बढ़ावा मिलेगा और अनावश्यक ट्रिपिंग की घटनाओं में कमी आएगी।

    हरित ऊर्जा के लिए भी उपयोगी होगी यह आधुनिक तकनीक
    प्रदेश में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार लगातार हो रहा है। इन स्रोतों का उत्पादन मौसम पर निर्भर होने के कारण इनमें उतार-चढ़ाव बना रहता है। ्रढ्ढ आधारित विश्लेषण प्रणाली मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का बेहतर पूर्वानुमान तैयार कर सकेगी, जिससे ग्रिड संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    एआई से होंगे ये फायदे

    • मांग बढऩे का पहले से मिलेगा अनुमान
    • ग्रिड की 24 घंटे स्मार्ट निगरानी
    • ड्रोन से ट्रांसमिशन लाइनों की जांच
    • खराबी आने से पहले होगी मरम्मत
    • ट्रिपिंग और तकनीकी फाल्ट में आएगी कमी
    • सौर और पवन ऊर्जा का बेहतर प्रबंधन

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