
नई दिल्ली. लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) का आज 99वां जन्मदिन (99th birthday) है। पीएम मोदी (PM Modi) ने उनके लिए विशेष चिट्ठी लिखी है। जिसमें उन्होंने उनके व्यक्तित्व और जीवनयात्रा के बारे में लिखा है।
उन्होंने लिखा कि आडवाणीजी ने बिना कड़वाहट शून्य से जिंदगी खड़ी की। अटलजी के साथ मिलकर भारतीय राजनीति की दिशा बदली। उन्होंने लिखा- 8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन कराची में जन्मे आडवाणी का जीवन आधुनिक भारत के अनेक ऐतिहासिक अध्यायों का साक्षी रहा है। 1947 में विभाजन की त्रासदी ने उन्हें अपना घर और परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा।
प्रभु श्रीराम और दीपोत्सव के साथ जुड़ा यह दिन इसलिए भी विशेष है कि इसी वर्ष हम जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहे हैं।
आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा की, लेटर की 4 बड़ी बातें
1947 में विभाजन की त्रासदी ने उन्हें अपना घर और परिचित परिवेश छोड़ने को विवश किया, लेकिन इस पीड़ा ने उनके भीतर कोई कड़वाहट नहीं पैदा की। नए सिरे से जीवन खड़ा करने का उनका संकल्प आगे चलकर जनसंघ को मजबूत बनाने और भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में भी दिखाई दिया।
आडवाणी जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी की मित्रता और राजनीतिक साझेदारी भारतीय लोकतंत्र की अनूठी मिसाल है। पांच-छह दशकों तक दोनों ने परस्पर विश्वास, सम्मान और सहयोग के साथ काम किया। राजनीति के इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं, जब दो बड़े कद के नेता इतने लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हों।
उनके जीवन का एक और महत्वपूर्ण आयाम लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता है। आपातकाल के दौरान उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। 1977 में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में और बाद में गृह मंत्री तथा उप प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध उनका दृढ़ रुख सदैव उल्लेखनीय रहेगा।
सोमनाथ से अयोध्या तक की ऐतिहासिक रथयात्रा उनके जीवन का एक निर्णायक अध्याय है। मुझे इसकी परिकल्पना, तैयारी और संचालन से जुड़ने का अवसर मिला। वर्षों बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण उस संकल्प की ऐतिहासिक परिणति बना।
आडवाणी ने 1987 में सोमनाथ से बिहार के समस्तीपुर तक की रथ यात्रा निकाली थी। उन्होंने इस यात्रा की जिम्मेदारी मोदी को सौंपी थी।
आडवाणी ने 1987 में सोमनाथ से बिहार के समस्तीपुर तक की रथ यात्रा निकाली थी। उन्होंने इस यात्रा की जिम्मेदारी मोदी को सौंपी थी।
‘सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, निजी जिंदगी में सादगी’
उन्होंने लिखा, आडवाणी जी ने अपने आचरण से हमेशा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। जबकि, सादगी और संवेदनशीलता उनका एक विशेष पक्ष है। वे अध्ययनशील हैं, इतिहास, साहित्य, सिनेमा और रंगमंच में गहरी रुचि रखते हैं।
उनकी पुस्तक ‘माई कंट्री माई लाइफ’ उनके अनुभवों और ऐतिहासिक दृष्टि का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अपनी सिंधी संस्कृति से उनका जुड़ाव और सिंधु दर्शन को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान भी उल्लेखनीय है।
उनकी इस लंबी यात्रा में कमला आडवाणी जी का योगदान भी अविस्मरणीय है। वे हर परिस्थिति में उनकी शक्ति और संबल बनी रहीं। राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके जीवनभर के राष्ट्रसेवा के समर्पण के प्रति देश की कृतज्ञता का प्रतीक है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved