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भारत-इंडोनेशिया के बीच लोकल करेंसी ट्रेड पर सहमति

July 07, 2026

नई दिल्ली: भारत और इंडोनेशिया ने आर्थिक और डिजिटल सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट लिंक और लोकल करेंसी ट्रांजैक्शन (LCT) यानी भारतीय रुपये और इंडोनेशियाई रुपिया में सीधे लेनदेन को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है.

संयुक्त बयान के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंक इंडोनेशिया के बीच स्थानीय मुद्रा में भुगतान और क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट सिस्टम को लागू करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है. दोनों देशों का कहना है कि इससे भुगतान व्यवस्था ज्यादा तेज, सस्ती और सुरक्षित होगी, साथ ही व्यापार और निवेश को भी नई रफ्तार मिलेगी.

क्या है क्रॉस-बॉर्डर QR पेमेंट?
अभी अगर कोई भारतीय पर्यटक इंडोनेशिया में खरीदारी करता है, तो भुगतान की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क या अमेरिकी डॉलर के माध्यम से होती है. इससे विदेशी मुद्रा विनिमय और बैंकिंग शुल्क अलग से लगते हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय पर्यटक भारत में इस्तेमाल होने वाले UPI से इंडोनेशिया के QR कोड स्कैन कर भुगतान कर सकेंगे. इसी तरह इंडोनेशियाई नागरिक भारत आने पर अपने देश के QR सिस्टम के जरिए भुगतान कर सकेंगे. भुगतान दोनों देशों की स्थानीय मुद्रा में होगा और डॉलर की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी.

लोकल करेंसी ट्रांजेक्शन (LCT) क्या है?
LCT का अर्थ है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार का भुगतान सीधे भारतीय रुपये और इंडोनेशियाई रुपिया में किया जा सकेगा. अभी अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार अमेरिकी डॉलर के माध्यम से होता है. यानी भारतीय आयातक पहले रुपये को डॉलर में बदलता है और फिर डॉलर को रुपिया में परिवर्तित किया जाता है. इससे अतिरिक्त लागत और विनिमय दर का जोखिम बढ़ जाता है. नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया सरल होगी क्योंकि भुगतान सीधे दोनों देशों की मुद्राओं में किया जा सकेगा.

किसे होगा सबसे बड़ा फायदा?
1. पर्यटक
भारतीय पर्यटकों को इंडोनेशिया में भुगतान के लिए नकद डॉलर रखने की जरूरत कम होगी
मुद्रा बदलने का अतिरिक्त खर्च बचेगा.
QR स्कैन कर तुरंत भुगतान किया जा सकेगा.

2. छात्र
इंडोनेशिया में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों और भारत में पढ़ने वाले इंडोनेशियाई छात्रों के लिए फीस और दैनिक भुगतान आसान होंगे.

3. व्यापारी और MSME
छोटे और मध्यम उद्योगों को डॉलर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
लेनदेन की लागत घटेगी.
भुगतान तेजी से होगा, जिससे व्यापार बढ़ने की संभावना है.

4. निवेशक
स्थानीय मुद्रा में भुगतान होने से विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होगा.
दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

भारत के लिए रणनीतिक महत्व
यह कदम भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और स्थानीय मुद्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा है. हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ UPI और स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ाने की पहल की है. इंडोनेशिया के साथ यह व्यवस्था दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की आर्थिक और डिजिटल मौजूदगी को और मजबूत करेगी.

संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा है कि क्रॉस बॉर्डर QR पेमेंट लिंकेज और लोकल करेंसी ट्रांजेक्शन से व्यापार, निवेश, पर्यटन, छात्रों और MSME क्षेत्र के लिए नए अवसर बनेंगे. साथ ही इससे दोनों देशों के बीच वित्तीय एकीकरण मजबूत होगा और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.

अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता होगी कम
भारत और इंडोनेशिया के बीच रुपया-रुपिया में व्यापार की तैयारी सिर्फ भुगतान को आसान नहीं बनाएगी, बल्कि द्विपक्षीय कारोबार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता भी कम कर सकती है. अगर आयात-निर्यात का भुगतान सीधे रुपये और रुपिया में होने लगता है, तो कारोबारियों को पहले डॉलर खरीदने और फिर दूसरी मुद्रा में बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे लेनदेन की लागत घटेगी और विनिमय दर के जोखिम में भी कमी आएगी.

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब BRICS समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही हैं. हालांकि भारत-इंडोनेशिया समझौते में BRICS की डीडॉलराइजेशन नीति का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है, लेकिन स्थानीय मुद्रा में व्यापार की व्यवस्था डॉलर पर निर्भरता कम करने की व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप मानी जा रही है.

सबांग पोर्ट के विकास में भारत की भागीदारी
संयुक्त बयान में इंडोनेशिया ने सबांग पोर्ट के विकास में भारत की भागीदारी का स्वागत किया है. दोनों देशों ने इस परियोजना की रूपरेखा, वित्तीय मॉडल और क्रियान्वयन पर आगे काम करने पर सहमति जताई है. सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के आचे प्रांत में स्थित है और यह मलक्का स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के बेहद करीब है. मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. पश्चिम एशिया से पूर्वी एशिया तक जाने वाले बड़ी संख्या में तेल और मालवाहक जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं. इसलिए इस क्षेत्र का सामरिक और आर्थिक महत्व बेहद बड़ा माना जाता है.

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