
नई दिल्ली । शरीर (Body) के प्रत्येक अंग को सामान्य रूप से काम करने के लिए लगातार ऑक्सीजन (Oxygen) की जरूरत होती है। सांस के जरिए फेफड़ों (Lungs) तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन (Oxygen) खून में मिलती है और फिर रक्त (Blood) के माध्यम से दिमाग , हृदय , मांसपेशियों (Muscles) तथा शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचती है। जब खून में ऑक्सीजन का स्तर (Oxygen Level) कम होने लगता है, तो इसे मेडिकल भाषा में हाइपोक्सीमिया (Hypoxemia) कहा जाता है। यह स्थिति कई कारणों से हो सकती है और कुछ मामलों में समय पर ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है।
ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर शरीर शुरुआत में इसकी भरपाई करने की कोशिश करता है। इसके लिए सांस लेने की गति बढ़ सकती है और हृदय तेजी से धड़कने लग सकता है। ऐसे में व्यक्ति को सांस फूलने, बेचैनी या घबराहट जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते और कुछ मामलों में ऑक्सीजन कम होने के बावजूद स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं देते।
सांस फूलना ऑक्सीजन की कमी का सबसे आम संकेत माना जाता है। व्यक्ति को ऐसा लग सकता है कि उसे पर्याप्त हवा नहीं मिल रही है या पूरी सांस लेने के लिए बार-बार गहरी सांस लेनी पड़ रही है। कुछ लोगों में थोड़ी शारीरिक गतिविधि के बाद ही सांस तेज चलने लगती है, जबकि गंभीर स्थिति में आराम करते समय भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हालांकि सांस फूलने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इसे केवल ऑक्सीजन की कमी से जोड़ना उचित नहीं है।
ऑक्सीजन की गंभीर कमी होने पर होंठ, नाखून या त्वचा का रंग नीला या नीला-सा दिखाई दे सकता है। इस स्थिति को सायनोसिस कहा जाता है। यदि चेहरे या होंठों का रंग बदलने के साथ सांस लेने में परेशानी भी हो रही हो, तो इसे गंभीर संकेत मानकर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
ऑक्सीजन कम होने पर हृदय की धड़कन तेज होना और बेचैनी भी महसूस हो सकती है। शरीर जब पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पा रहा होता है तो वह रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सांस तथा हृदय की गति बढ़ाने की कोशिश करता है। यदि इन लक्षणों के साथ सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में गंभीर परेशानी हो, तो देरी नहीं करनी चाहिए।
मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर चक्कर, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी, भ्रम या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। अत्यधिक कमजोरी और असामान्य नींद भी गंभीर ऑक्सीजन की कमी के संकेत हो सकते हैं। स्थिति बहुत बिगड़ने पर बेहोशी जैसी समस्या भी हो सकती है।
शरीर में ऑक्सीजन की स्थिति जानने के लिए आमतौर पर पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल किया जाता है। स्वस्थ लोगों में ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO₂ सामान्यतः 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहता है। हालांकि फेफड़ों या हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियों वाले लोगों में सामान्य स्तर अलग हो सकता है, इसलिए उनकी रीडिंग का मूल्यांकन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
ऑक्सीजन कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। निमोनिया, अस्थमा, सीओपीडी और फेफड़ों के संक्रमण जैसी स्थितियां सांस के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियां, सांस लेने में रुकावट, फेफड़ों में रक्त का थक्का और अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना भी ऑक्सीजन स्तर को प्रभावित कर सकता है।
केवल ऑक्सीमीटर की एक रीडिंग या किसी एक लक्षण के आधार पर बीमारी का कारण तय नहीं किया जा सकता। यदि ऑक्सीजन की रीडिंग लगातार कम आ रही है, सांस लेने में परेशानी बढ़ रही है, होंठ नीले पड़ रहे हैं, भ्रम हो रहा है या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। समय पर कारण की पहचान और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved