
नई दिल्ली । सूडान (Sudan) में जारी गृहयुद्ध के बीच सूडानी सेना (Sudanese Army) पर रासायनिक हथियारों (Chemical Weapons) के इस्तेमाल के गंभीर आरोप (Allegations) सामने आए हैं। गोपनीय दस्तावेजों, (Documents) वीडियो, तस्वीरों और इंटरसेप्ट किए गए फोन संवादों के आधार पर तैयार किए गए दस्तावेजों में दावा किया गया है कि 2024 के दौरान रैपिड सपोर्ट फोर्सेज यानी आरएसएफ (RSF) के खिलाफ क्लोरीन आधारित रासायनिक हथियारों (Chemical Weapons) का इस्तेमाल किया गया।
सूडान में सेना और आरएसएफ के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। इस संघर्ष ने राजधानी खारतूम समेत देश के कई हिस्सों में भारी मानवीय संकट पैदा किया है। इसी दौरान रासायनिक हथियारों के कथित इस्तेमाल ने युद्ध के तौर-तरीकों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, कथित रासायनिक हथियार कार्यक्रम की निगरानी ब्रिगेडियर जनरल तारिक हुसैन से जुड़ी थी। आरोप है कि सेना ने जल शोधन व्यवस्था के लिए उपलब्ध क्लोरीन संसाधनों का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्य के लिए किया। यह दावा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ऐसे संसाधनों का इस्तेमाल युद्ध प्रभावित इलाकों में पानी को सुरक्षित बनाने और हैजा जैसी बीमारियों से बचाव के लिए किया जाता है।
दस्तावेजों में दावा किया गया है कि 2024 के मध्य में इस योजना को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद सैन्य ठिकानों पर कथित तौर पर रासायनिक हथियारों की तैयारी और परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अक्टूबर 2024 तक बड़ी संख्या में ऐसे हथियार तैयार किए जा चुके थे।
कथित दस्तावेजों में जुलाई 2024 में रेगिस्तानी इलाके में किए गए एक परीक्षण का भी उल्लेख है। इसके बाद सितंबर में अल-जैली तेल रिफाइनरी के आसपास रासायनिक हमले का आरोप लगाया गया। इस घटना के संदर्भ में इंटरसेप्ट किए गए संदेशों का हवाला दिया गया है। कथित हमले के बाद कुछ लड़ाकों को सुरक्षात्मक मास्क पहने देखे जाने की बात भी सामने आई है।
इन आरोपों में सूडानी सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि उन्हें कथित कार्यक्रम की जानकारी थी और बाद में इसके प्रमाण हटाने के निर्देश दिए गए। हालांकि, ऐसे आरोपों की स्वतंत्र और पूर्ण पुष्टि अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण होगी।
अमेरिका ने इससे पहले रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के संदेह को लेकर सूडान के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठाए थे। नए आरोप सामने आने के बाद इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। विशेष रूप से यह सवाल उठ रहा है कि कथित हथियार कार्यक्रम में सैन्य नेतृत्व की जानकारी और जिम्मेदारी किस स्तर तक थी।
दस्तावेजों के अनुसार, बाद में सूडानी सेना की ओर से कथित आरोपों की जांच के लिए आंतरिक व्यवस्था भी बनाई गई। आलोचकों ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आरोपों से जुड़े अधिकारी ही जांच व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभाएं, तो स्वतंत्र जांच की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद गंभीर विषय माना जाता है। ऐसे हथियारों से सैन्य कर्मियों के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। सूडान जैसे संघर्षग्रस्त देश में इसका प्रभाव और व्यापक हो सकता है, जहां पहले से ही स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी सुविधाएं दबाव में हैं।
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल कथित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि, हमलों की परिस्थितियों की जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही का है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो इससे सूडान के गृहयुद्ध में सैन्य कार्रवाई और मानवीय कानूनों के पालन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर कार्रवाई की मांग और तेज हो सकती है।
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