
नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने संसद (Parliament) में विपक्ष (Opposition) द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री (Prime Minister) को हटाने का प्रस्ताव लाना है तो लाएँ। उन्होंने स्पीकर के खिलाफ उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए लोकतंत्र और विधायी चेतना पर जोर दिया। शाह ने कहा कि स्पीकर विधायी न्यायशास्त्र के सर्वोच्च अधिकारी हैं और उनके खिलाफ गलत तरीके से सवाल उठाना संविधान की गरिमा पर सवाल उठाने के समान है।
उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा, “लाएँ न प्रधानमंत्री जी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव। कोई विरोध नहीं कर रहा। मुद्दों पर चर्चा करेंगे।” शाह ने बताया कि संविधान में ऐसी परिस्थितियों के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए गए हैं।
स्पीकर को हटाने का नियम
शाह ने कहा कि लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए 94(सी) के तहत प्रभावी बहुमत की आवश्यकता होती है। यह प्रावधान असाधारण परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है और रोजमर्रा के लिए नहीं है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान ने विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग बहुमत तय किया है।
प्रधानमंत्री को हटाने के लिए बहुमत
अमित शाह ने संसद में तीन प्रकार की बहुमत की व्याख्या दी:-
साधारण बहुमत (Simple Majority)
सदन में उस दिन उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 50 प्रतिशत से अधिक का समर्थन। प्रधानमंत्री को हटाने के लिए यही बहुमत चाहिए। उदाहरण के लिए, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिली थीं, और वह अन्य गठबंधन दलों के साथ सरकार चला रही है।
प्रभावी बहुमत (Effective Majority)
सदन की कुल क्षमता में से खाली सीटों को घटाने के बाद बची संख्या का 50 प्रतिशत से अधिक। स्पीकर को हटाने के लिए यही बहुमत जरूरी होता है।
विशेष बहुमत (Special Majority)
इसमें दो शर्तें पूरी होनी चाहिए: सदन की कुल सदस्य संख्या का 50 प्रतिशत से अधिक समर्थन और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो तिहाई बहुमत। यह संविधान संशोधन विधेयक, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने या राष्ट्रीय आपातकाल के अनुमोदन के लिए जरूरी होता है।
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