img-fluid

फ्रांस से 10 मिराज भारत लाने वाले आशुतोष दीक्षित बने नए IAF चीफ, 3300 घंटे की उड़ान और 3 राष्ट्रपति पदकों का शानदार रिकॉर्ड

October 07, 2026

नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना(Indian Air Force) को नया प्रमुख मिल गया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित (Air Marshal Ashutosh Dixit)ने भारतीय वायु सेना(Indian Air Force) के चीफ ऑफ एयर स्टाफ (Chief of the Air Staff)के रूप में कमान संभाल ली है। करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने फाइटर पायलट से लेकर वायु सेना के शीर्ष पद तक का सफर तय किया है। उनके करियर में युद्ध अभियानों से लेकर फाइटर विमानों के परीक्षण और रणनीतिक योजना तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने के महत्वपूर्ण मिशन से लेकर कारगिल युद्ध के दौरान निभाई गई जिम्मेदारी तक उनका सैन्य सफर कई उपलब्धियों से भरा रहा है।

आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी की 69वीं कोर्स के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने बांग्लादेश से स्टाफ कोर्स किया और नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज से 57वें एनडीसी कोर्स के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया। सैन्य शिक्षा के साथ उनके पास विमान उड़ाने का भी लंबा अनुभव है।

आशुतोष दीक्षित एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्होंने मिराज 2000 सहित कई फाइटर विमान ट्रेनर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं। उनके नाम 3300 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है। लंबे फ्लाइंग करियर ने उन्हें भारतीय वायु सेना के ऑपरेशनल और तकनीकी दोनों पहलुओं की गहरी समझ दी।

उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय जिम्मेदारियों में फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने का मिशन भी शामिल है। विंग कमांडर के तौर पर उन्हें फ्रांस से 10 मिराज विमानों को सुरक्षित भारत लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने दो बैच में इस मिशन को पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी सीमा पर मिराज 2000 की 9वीं स्क्वाड्रन की कमान संभाली और उसे कम समय में कॉम्बैट रेडी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर और सीमा पर चले ऑपरेशन रक्षक में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में ग्रुप कैप्टन के रूप में उन्होंने छह बड़ी विदेशी कंपनियों के फाइटर जेट्स के फील्ड ट्रायल और तकनीकी मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया। इससे उनकी तकनीकी समझ और रणनीतिक क्षमता का पता चलता है।

आशुतोष दीक्षित को उनकी सेवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण सैन्य सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें 26 जनवरी 2006 को वायु सेना मेडल दिया गया। इसके बाद 26 जनवरी 2011 को विशिष्ट सेवा मेडल और 26 जनवरी 2023 को अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनके लंबे सैन्य करियर में निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और सेवाओं को दर्शाते हैं।


  • अपने 38 साल से अधिक लंबे करियर में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर और कमान स्तर पर कई अहम पद संभाले। वह एएसटीई बेंगलुरु की फाइटर टेस्ट स्क्वाड्रन और ग्वालियर की 9वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में प्रोजेक्ट्स और प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद प्रयागराज स्थित सेंट्रल एयर कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर रहने के बाद अब उन्होंने भारतीय वायु सेना के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाल ली है।

    Share:

  • सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved