
डेस्क: असम की 129 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है. ऐसे में हाल ही में राज्य सरकार की तरफ से फैसला लिया गया था कि यहां चुनाव ड्यूटी के लिए 1,600 से ज्यादा असम वन सुरक्षा बल (AFPF) के जवानों को तैनात किया जाएगा. अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की दो सदस्यीय पीठ ने असम सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी है. NGT की पूर्वी क्षेत्र पीठ में जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह शामिल हैं. यहां पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और असम के विशेष मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी है.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की चिंता यह थी कि वन अधिकारियों को तैनात करने से वनों की निगरानी कमजोर पड़ सकती है. एनजीटी ने कहा कि राज्य में खासकर शिकार की बढ़ती घटनाओं को को लेकर चिंता जाहिर की. NGT ने तर्क दिया कि ये कानून के लिहाज से सही नहीं है.
पूर्व अधिकारियों और पर्यावरणविदों के एक समूह की ओर से असम सरकार और मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखा गया एक पत्र मिला है, जिसमें इन वन कर्मियों की तैनाती का विरोध किया गया. उनका तर्क है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के एक स्पष्ट निर्देश और EC की ओर से तय किए गए स्थापित प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करता है. यह पत्र 19 मार्च, 2026 को असम के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष मुख्य सचिव एम.के. यादव की ओर से जारी किए गए आदेश को गलत बताया है.
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