
नई दिल्ली। ईरान (Iran) के साथ जारी तनाव और सीजफायर (ceasefire) की कोशिशों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने साफ कर दिया है कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं रुकेगी। लेबनान में तेज हमलों के बीच उनका यह बयान हालात को और गंभीर बना रहा है।
बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर कहा कि इजरायल की सेना पूरी ताकत, सटीकता और दृढ़ता के साथ हिज्बुल्लाह को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और इसका मकसद देश के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि कार्रवाई किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगी। उनके मुताबिक, जहां भी जरूरत होगी, वहां हिज्बुल्लाह पर हमला किया जाएगा।
सुरक्षा बहाल करना मुख्य लक्ष्य
नेतन्याहू ने कहा कि इन हमलों का अंतिम उद्देश्य उत्तरी इजरायल के लोगों की सुरक्षा बहाल करना है, ताकि वहां से विस्थापित लोग अपने घर लौट सकें। उन्होंने दोहराया कि जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेगा।
हालांकि, लेबनान में जारी हमलों से अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी सीजफायर खतरे में पड़ गया है। ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इसके जवाब में तेहरान ने इस हफ्ते इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत से बाहर निकलने की धमकी भी दी है।
होर्मुज को लेकर यूरोप की चिंता
इसी बीच, यूरोपीय संघ ने साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बिना किसी शुल्क के होनी चाहिए। यह बयान उस प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की बात कही थी। यूरोप का कहना है कि यह समुद्री रास्ता पूरी दुनिया के लिए अहम है और यहां स्वतंत्र आवाजाही जरूरी है।
ईरान में जारी संघर्ष में मरने वालों की संख्या 3000 के पार पहुंच गई है। देश के फॉरेंसिक प्रमुख अब्बास मस्जेदी अरानी के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल के हमलों में हजारों लोगों की जान गई है।
वहीं, लेबनान में भी हालात बेहद खराब हैं। स्वास्थ्य मंत्री राकान नासेरद्दीन के अनुसार, इजरायली हमलों में अब तक 203 लोगों की मौत हो चुकी है और 1000 से ज्यादा लोग घायल हैं। पहले जारी आंकड़ों की तुलना में यह संख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे हालात की गंभीरता साफ दिखती है।
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