
बरेली। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (All India Muslim Jamaat) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी (Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi) ने महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) में संशोधन का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक पहल बताया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी आधी आबादी को आरक्षण देकर उन्हें बराबरी का अवसर देने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो सराहनीय है।
क्या बोले मौलाना ?
मौलाना के अनुसार, प्रधानमंत्री की मंशा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में अधिक से अधिक महिलाएं संसद तक पहुंचें और उनका नेतृत्व उभरकर सामने आए। हालांकि, उन्होंने मुस्लिम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर अलग राय भी रखी। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति पहले जैसी नहीं रही और इसमें काफी बदलाव आ चुका है। मौजूदा सियासत को उन्होंने “मक़्र और फरेब का जाल” बताते हुए कहा कि यह एक दलदल की तरह है, जहां महिलाओं को सम्मान और मर्यादा मिलना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि सियासी मैदान में महिलाओं को इज्जत, सम्मान, विकार नहीं मिल सकता. और बेपर्दागी भी होगी। इस्लाम महिलाओं को घर की “जीनत” मानता है और उनकी सुरक्षा व सम्मान के मद्देनजर उन्हें ऐसी राजनीति से दूर रहने की सलाह देता है।
मुस्लिम महिलाओं को सियासत से दूरी बनाए रखना बेहतर
मौलाना ने मुस्लिम महिलाओं को सुझाव दिया कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद 33% आरक्षण के तहत कोई भी महिला चुनाव लड़ सकती है और नेतृत्व कर सकती है, लेकिन मुस्लिम महिलाओं के लिए सियासत से दूरी बनाए रखना बेहतर होगा।
लोकसभा में पेश होंगे ये तीन अहम विधेयक
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किए जाने वाले तीन अहम विधेयकों की सूची जारी की गई है, जिनका उद्देश्य 2029 तक महिला आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है। इनमें पहला, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रावधान करता है, जिसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। दूसरा, परिसीमन विधेयक 2026, 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा है। तीसरा विधेयक, केंद्र शासित प्रदेशों—जैसे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी—में महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ करेगा।
ये तीनों विधेयक मिलकर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। इनका उद्देश्य 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करना है। हालांकि यह कानून पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी थे। यदि ये विधेयक पारित होते हैं, तो 2029 के चुनाव में लोकसभा में 270 से अधिक महिला सांसद देखने को मिल सकती हैं, जो भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
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