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घर में धार्मिक ग्रंथ रखने से पहले जान लें वास्तु के ये अहम नियम सही दिशा बदल सकती है जीवन की सकारात्मक ऊर्जा

June 28, 2026

नई दिल्ली। सनातन परंपरा(Sanatan tradition) में रामायण(Ramayana)भगवत गीता(Bhagavad Gita) हनुमान चालीसा(Hanuman Chalisa) और अन्य धार्मिक ग्रंथों को केवल पुस्तक नहीं बल्कि आस्था और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इन्हें घर में सम्मानपूर्वक रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इन पवित्र ग्रंथों को सही दिशा और उचित स्थान पर रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार के सदस्यों के जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार धार्मिक ग्रंथों को रखने के लिए घर की पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। पूर्व दिशा को ज्ञान प्रकाश और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है क्योंकि इसी दिशा से सूर्य का उदय होता है। वहीं यदि घर में पूजा का स्थान बनाया गया है तो उसका सबसे उपयुक्त स्थान ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा माना जाता है। ऐसे में धार्मिक पुस्तकों को भी पूजा स्थल के आसपास सम्मानपूर्वक रखना शुभ माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों को रखते समय इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भगवान की मूर्ति या तस्वीर के बाईं ओर रखा जाए। कई लोग सुविधा के लिए इन्हें मंदिर की शेल्फ या मंदिर के ऊपर रख देते हैं लेकिन वास्तु के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। इन पुस्तकों के लिए अलग स्थान या अलग शेल्फ बनाना अधिक शुभ माना जाता है ताकि उनका सम्मान बना रहे।

वास्तु शास्त्र यह भी कहता है कि धार्मिक ग्रंथों को कभी भी ऐसी जगह नहीं रखना चाहिए जहां गंदगी रहती हो या जहां उनका अनादर होने की संभावना हो। बेडरूम में भी इन पवित्र पुस्तकों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से इन्हें दूसरे कमरे में रखना पड़े तो साफ सुथरी और शांत जगह का चयन करना चाहिए।


  • एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि धार्मिक पुस्तकों को एक दूसरे के ऊपर ढेर बनाकर नहीं रखना चाहिए। प्रत्येक पुस्तक को अलग स्थान देना चाहिए ताकि उनका सम्मान बना रहे। साथ ही इन पुस्तकों को खड़ी अवस्था में रखने के बजाय समतल स्थिति में रखना बेहतर माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें लाल या पीले रंग के स्वच्छ कपड़े में लपेटकर रखने की परंपरा भी बताई गई है। लाल और पीला रंग शुभता तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं काले या नीले रंग के कपड़े में धार्मिक ग्रंथों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इन छोटे छोटे वास्तु नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक ग्रंथों का सम्मान बना रहता है बल्कि घर का वातावरण भी सकारात्मक और शांत बना रहता है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं। इनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था और श्रद्धा के अनुसार कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पवित्र ग्रंथों को हमेशा स्वच्छता सम्मान और श्रद्धा के साथ रखा जाए क्योंकि यही उनकी वास्तविक मर्यादा मानी जाती है।

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