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6 करोड़ से संवरे भंवरताल में फिर छाई बदहाली उखड़ रहे पाथ-वे, सूख रही हरियाली

July 13, 2026

  • मेंटेनेंस पर लापरवाही, प्रवेश शुल्क की वसूली जारी, स्केटिंग रिंग की आय और रखरखाव पर भी उठे सवाल

जबलपुर। शहर की पहचान और पर्यटन का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले भंवरताल गार्डन की चमक अब धीरे-धीरे फीकी पड़ती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किए गए इस गार्डन में अब रखरखाव की गंभीर कमी सामने आने लगी है। करीब 6 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कराए गए सौंदर्यीकरण और विकास कार्य समय से पहले ही दम तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। कोबलिंग पाथ-वे उखडऩे लगे हैं, धौलपुरी पत्थर अपनी जगह छोड़ रहे हैं, ग्रास पेवर्स सूख चुके हैं और कई स्थानों पर पेवर फ्लोर व टाइल्स क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि नगर निगम भंवरताल गार्डन में प्रवेश करने वाले प्रत्येक पर्यटक से शुल्क तो नियमित रूप से वसूल रहा है, लेकिन उसी गार्डन के रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। नगर निगम के उद्यान विभाग की जिम्मेदारी होने के बावजूद मेंटेनेंस कार्य उपेक्षा का शिकार है, जिसका असर अब पूरे गार्डन की सुंदरता पर साफ दिखाई देने लगा है।



  • करोड़ों के विकास कार्य, लेकिन नहीं हो रही है देखरेख
    भंवरताल गार्डन में कोबलिंग पाथ-वे, धौलपुरी पत्थर, फ्लेम्ड ग्रेनाइट, स्टोन ग्रास, पेवर फ्लोर, ग्रास पेवर्स, डिमॉन्स्ट्रेशन वॉटर बॉडी, वॉटर फाउंटेन, ईको ज़ोन, एमपी थिएटर, कैफेटेरिया, ट्री हाउस प्लेटफॉर्म, लैंडस्केपिंग, फ्लावर बेड, टॉयलेट, एप्रोच रोड सहित कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई थीं। लेकिन अब इन अधिकांश कार्यों की हालत बिगड़ती जा रही है।गार्डन का आकर्षण मानी जाने वाली डिमॉन्स्ट्रेशन वॉटर बॉडी और फाउंटेन अक्सर बंद रहते हैं। खराबी आने पर इनके सुधार में लंबा समय लग जाता है, जिससे पर्यटक निराश होकर लौटते हैं।

    स्केटिंग रिंग की आय पर सवाल
    सूत्रों के अनुसार, भंवरताल गार्डन में करीब 50 लाख रुपये की लागत से स्केटिंग रिंग का निर्माण कराया गया था। वर्तमान में इसका संचालन निजी स्तर पर किया जा रहा है। यहां स्केटिंग सीखने आने वाले बच्चों और युवाओं से फीस वसूली जा रही है, लेकिन इस आय का कितना हिस्सा नगर निगम के खाते में जमा हो रहा है और उसका उपयोग किस मद में किया जा रहा है, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    पर्यटकों को हो रही परेशानी
    गार्डन की अव्यवस्थाओं का सीधा असर यहां आने वाले पर्यटकों पर पड़ रहा है। शौचालय झाडिय़ों के बीच होने के कारण लोगों को उन्हें खोजने में परेशानी होती है। पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से अधिकांश लोगों को बाहर से पानी खरीदना पड़ता है। जगह-जगह उखड़े पाथ-वे बुजुर्गों और बच्चों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।शाम के समय गार्डन में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से लोग असुरक्षित महसूस करते हैं। वहीं असामाजिक तत्वों की मौजूदगी और सुरक्षा कर्मियों की कमी भी लोगों की चिंता बढ़ा रही है।

    फूलों की खुशबू भी हुई गायब
    एक समय अपनी रंग-बिरंगी फूलों की क्यारियों और हरियाली के लिए प्रसिद्ध भंवरताल गार्डन में अब फूलों की बहार भी कम होती जा रही है। कई स्थानों पर घास सूख चुकी है और फूलों की क्यारियां भी पहले जैसी आकर्षक नहीं रहीं। इससे गार्डन की प्राकृतिक सुंदरता लगातार प्रभावित हो रही है।

    तो फिर गार्डन का रखरखाव क्यों नहीं
    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब प्रवेश शुल्क नियमित रूप से लिया जा रहा है और करोड़ों रुपये जनता के टैक्स से खर्च किए गए हैं, तो फिर गार्डन का रखरखाव क्यों नहीं हो रहा? लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि गार्डन की सभी क्षतिग्रस्त संरचनाओं का तत्काल मरम्मत कार्य कराया जाए, वॉटर बॉडी और फाउंटेन नियमित रूप से चालू रखे जाएं, हरियाली को पुनर्जीवित किया जाए तथा स्केटिंग रिंग से होने वाली आय का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए। नगर निगम यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं देता, तो शहर की सबसे खूबसूरत पहचान माने जाने वाला भंवरताल गार्डन भी बदहाली की तस्वीर बनकर रह जाएगा।

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