नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों और उनके परिवारों को राहत देते हुए सिक्योरिटीज ट्रांसफर (Securities Transfer) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब किसी निवेशक की मृत्यु के बाद उसके शेयर, बॉन्ड (Stocks, Bonds) या अन्य सिक्योरिटीज को नॉमिनी अथवा कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज होगी। इसके लिए दस्तावेजों की संख्या कम की गई है और क्लेम की सीमा भी बढ़ा दी गई है।
सेबी की निदेशक मंडल बैठक में इस संबंध में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। नियामक ने कम मूल्य के दावों के निपटारे के लिए “क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग” (QTP) नाम से नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे छोटे दावों का निपटारा तेजी से किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत फिजिकल रूप में रखी गई सिक्योरिटीज के लिए 10 हजार रुपये तक और डीमैट खाते में मौजूद सिक्योरिटीज के लिए 30 हजार रुपये तक के दावों को क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग के तहत निपटाया जाएगा। इससे नॉमिनी और उत्तराधिकारियों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
सेबी ने सरलीकृत दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत सिक्योरिटीज ट्रांसफर की सीमा भी बढ़ा दी है। फिजिकल सिक्योरिटीज के मामले में प्रति सूचीबद्ध कंपनी सीमा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं डीमैट सिक्योरिटीज के लिए प्रति लाभार्थी यह सीमा 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है।
प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए सेबी ने पैन कार्ड जमा कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। नियामक का मानना है कि डीमैट खाता खोलते समय निवेशकों का पैन विवरण पहले से उपलब्ध रहता है, इसलिए दोबारा इसकी जरूरत नहीं है।
इसके अलावा उत्तराधिकार कानूनों में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए वसीयत (विल) के सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है, जिससे उत्तराधिकारियों को अतिरिक्त औपचारिकताओं से राहत मिलेगी।
दावों के सत्यापन को आसान बनाने के लिए अब मूल या सत्यापित प्रतियों के साथ क्यूआर कोड वाले मृत्यु प्रमाणपत्रों की कॉपी भी स्वीकार की जाएगी। वहीं विदेशों में जारी मृत्यु प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं या भारतीय बैंकों से संबद्ध विदेशी बैंकों के माध्यम से अतिरिक्त सत्यापन की व्यवस्था की गई है।
बैठक में सेबी बोर्ड के सदस्यों और कर्मचारियों के लिए हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट), पारदर्शिता और खुलासे से जुड़े नियमों को और मजबूत बनाने का भी फैसला लिया गया। इसके लिए सेबी (कर्मचारी सेवा) विनियम, 2001 में संशोधनों को मंजूरी दी गई है।
सेबी के अनुसार, यह कदम उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है। समिति ने बोर्ड सदस्यों और कर्मचारियों से जुड़े हितों के टकराव तथा खुलासे से संबंधित प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। संशोधित आचार संहिता और नए नियम निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने तथा राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद सेबी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
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