नई दिल्ली। मंगोलिया (Mongolia) में ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic plague) का नया मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। देश के पश्चिमी खोव्द (Khovd) प्रांत में एक व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि हुई है। शुरुआती जांच के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति ने यात्रा के दौरान मार्मोट नामक जंगली कृंतक का मांस खाया था, जिसके बाद उसमें प्लेग के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। घटना के बाद मंगोलिया के 21 में से 17 प्रांतों को हाई-रिस्क जोन में रखा गया है।
मंगोलिया के राष्ट्रीय जूनोटिक रोग केंद्र (NCZDD) के मुताबिक, संक्रमित व्यक्ति हाल ही में पड़ोसी बायान-उल्गी प्रांत के उलानखुस क्षेत्र गया था। वहीं उसने मार्मोट का मांस खाया। कुछ समय बाद उसे तेज बुखार, कमजोरी और शरीर के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से गर्दन, बगल और जांघों में दर्दनाक सूजी हुई गांठें (ब्यूबोज़) बनने लगीं। अंतिम बैक्टीरियोलॉजिकल जांच में ब्यूबोनिक प्लेग संक्रमण की पुष्टि हुई।
मामले की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने आपात चेतावनी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे मार्मोट का शिकार न करें, उसके मांस या आंतरिक अंगों के संपर्क में न आएं और बीमार या मृत जंगली कृंतकों से दूरी बनाए रखें। अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी संक्रमण को तेजी से फैला सकती है।
मंगोलिया में मार्मोट के शिकार पर कानूनी प्रतिबंध लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों में इसका अवैध शिकार जारी है। स्थानीय स्तर पर इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन माना जाता है, जिसके कारण लोग नियमों की अनदेखी कर इसका सेवन करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यही प्रवृत्ति प्लेग के दोबारा फैलने का बड़ा कारण बन रही है।
NCZDD के विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों के दौरान प्लेग फैलने का जोखिम अधिक रहता है। इस मौसम में लोग ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों की यात्रा करते हैं, जहां मार्मोट और अन्य जंगली कृंतकों के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है। पिछले वर्षों में भी इसी अवधि में मंगोलिया में प्लेग के कई मामले सामने आ चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मंगोलिया के 21 में से 17 प्रांत फिलहाल प्लेग प्रभावित या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। पिछले वर्ष सितंबर में भी ब्यूबोनिक प्लेग के तीन पुष्ट मामले दर्ज हुए थे। उस समय संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लगभग 80 लोगों को एहतियातन आइसोलेट कर निगरानी में रखा गया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ब्यूबोनिक प्लेग यर्सिनिया पेस्टिस (Yersinia pestis) बैक्टीरिया से होने वाला गंभीर संक्रमण है। यह मुख्य रूप से संक्रमित पिस्सुओं के काटने या संक्रमित जंगली जानवरों के संपर्क अथवा उनके मांस के सेवन से फैल सकता है। समय पर एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है, लेकिन इलाज में देरी होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
ब्यूबोनिक प्लेग वही बीमारी है जिसने 14वीं शताब्दी में ‘ब्लैक डेथ’ के रूप में यूरोप और एशिया के बड़े हिस्से में तबाही मचाई थी। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, उस महामारी में करोड़ों लोगों की मौत हुई थी। हालांकि आधुनिक चिकित्सा और एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धता के कारण आज इसका प्रभावी इलाज संभव है, यदि मरीज समय पर अस्पताल पहुंच जाए।
WHO के आंकड़ों के अनुसार, ओशिनिया को छोड़कर लगभग सभी महाद्वीपों में समय-समय पर प्लेग के मामले सामने आते रहे हैं। हाल के वर्षों में कांगो (DRC), मेडागास्कर और पेरू उन देशों में शामिल हैं, जहां इस बीमारी के मामले अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किए गए हैं। ऐसे में मंगोलिया में सामने आया नया मामला इस बात की याद दिलाता है कि जंगली जानवरों के संपर्क और उनके अवैध शिकार से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम आज भी गंभीर बने हुए हैं।
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