
नई दिल्ली । सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके (CJP founder Abhijit Deepke) ने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) सबसे बड़े देशद्रोही और देशविरोधी हैं (Is biggest Traitor and Anti National) । उन्होंने 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाकर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया ।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। मीडिया में आई निर्वाचन आयोग की आंतरिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए दीपके ने आरोप लगाया कि देश के मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं और चुनाव आयोग का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दीपके ने कहा, “कल सामने आई चुनाव आयोग से जुड़ी एक रिपोर्ट से यह साबित होता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़े देशद्रोही और देशविरोधी हैं। उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। जब से वे इस पद पर आए हैं, सरकार तय कर रही है कि किसे वोट देने का अधिकार मिलेगा और किसे नहीं। क्या इसी को लोकतंत्र कहते हैं?”
निर्वाचन नामावली से हटाए गए नामों का मुद्दा उठाते हुए सीजेपी संस्थापक ने कहा कि देश भर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदान का लगभग 13 से 14 प्रतिशत है। उन्होंने गणितीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा : “2024 के लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी गठबंधन के बीच वोटों का अंतर महज 2 प्रतिशत का था। ऐसे में 13 करोड़ वोटों का काटा जाना कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। क्या ज्ञानेश कुमार जानबूझकर उस 2% के अंतर को बढ़ाने के लिए इतने बड़े पैमाने पर वोट काट रहे हैं, ताकि सत्ताधारी दल कभी चुनाव न हारे? इतने सारे वोट हटाने की आखिर क्या जरूरत थी?”
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि 2024 के आम चुनाव में बहुमत से चूकने के बाद एक सुनियोजित रणनीति के तहत क्षेत्रीय ताकतों और विपक्ष के प्रमुख चेहरों को निशाना बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र से करीब 50,000 वोट हटाए गए, और वे लगभग 15,000 वोटों के अंतर से हार गईं। तमिलनाडु में पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के क्षेत्र से 1,000,000 (1 लाख) वोट काटे गए, जहां हार का अंतर लगभग 45,000 वोटों का रहा। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्वाचन क्षेत्र से 40,000 वोट हटाए गए, जहां वे महज 4,000 से 5,000 वोटों से पीछे रह गए। केरल में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर वोट काटने का आरोप लगाया गया। अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का किसी विशिष्ट विपक्षी दल से कोई जुड़ाव नहीं है, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया, “यदि आप लोकतंत्र में पूरे विपक्ष को ही खत्म कर देंगे, तो क्या इसे लोकतंत्र कहा जा सकता है? क्या यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की परिभाषा है?”
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद गहराया है, जिसमें दावा किया गया था कि मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ के दौरान चुनाव आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए थे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल ने राजनीतिक भेदभाव के सभी आरोपों को खारिज किया है। आयोग का रुख रहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवैधानिक व नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल दोहरे, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाकर पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है।
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