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नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी, तिब्बत में तबाही के बीच मौतों का सही आंकड़ा क्यों नहीं बता रहा ड्रैगन?

August 29, 2026

नई दिल्ली। नेपाल (Nepal) में बुधवार को आई भीषण बाढ़ (flood) ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। मृतकों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है, जबकि 1,924 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस त्रासदी की शुरुआत चीन (China) के तिब्बत क्षेत्र से हुई मानी जा रही है, लेकिन चीन की ओर से अब तक केवल पांच लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। ऐसे में चीन की ओर से आपदा की वास्तविक स्थिति और जनहानि के आंकड़े छिपाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चीन में भी हुई तबाही, फिर भी जानकारी सीमित

एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का मीडिया भी इस आपदा को लेकर बेहद सीमित जानकारी सामने ला रहा है। रिपोर्टिंग के लिए मौके पर पहुंचने वाले पत्रकार भी आम लोगों और पीड़ितों से बातचीत करते नजर नहीं आते। रिपोर्टों में चीन के राहत-बचाव प्रयासों पर ही ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

ऐसे में सवाल यह है कि जब नेपाल में बाढ़ का इतना भयावह असर देखने को मिला है, तो तिब्बत में इस आपदा के वास्तविक प्रभाव और जनहानि की पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।


  • तिब्बतियों के लिए पत्रकारों से बात करना भी मुश्किल

    तिब्बत लंबे समय से चीन और तिब्बती समुदाय के बीच विवाद का विषय रहा है। चीन तिब्बत पर अपना अधिकार जताता है, जबकि तिब्बती समुदाय लंबे समय से अधिक स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग करता रहा है।

    तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की पहुंच पर कड़े प्रतिबंध हैं। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय लोगों के लिए भी विदेशी पत्रकारों से बातचीत करना जोखिम भरा हो सकता है। भाषा, संस्कृति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चीन की नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

    चीन ने राहत टीम भेजी, लेकिन काम की जानकारी नहीं

    चीन ने प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजने की जानकारी दी है, लेकिन इन टीमों ने जमीन पर किस तरह का काम किया और कितने लोगों को बचाया गया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    चीनी मीडिया के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव अभियान को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की थी। प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था।

    दो और ग्लेशियरों पर रखी जा रही नजर

    नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारी अब दो अन्य ग्लेशियरों पर भी निगरानी रखने की कोशिश कर रहे हैं। ये दोनों ग्लेशियर उस ग्लेशियर के आसपास स्थित हैं, जिसके टूटने के बाद बुधवार को विनाशकारी बाढ़ आई थी। ऐसे में आगे किसी और ग्लेशियर के टूटने की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।

    4 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया

    ‘नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी’ के ताजा अपडेट के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि लापता लोगों की संख्या अभी भी काफी अधिक है। ताजा आंकड़ों में 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।

    खोज और बचाव अभियान को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

    लापता विदेशियों के आंकड़ों में भी अंतर

    लापता विदेशी नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में 517 विदेशी नागरिकों और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोगों के लापता होने की बात कही गई है। वहीं, नेपाल पुलिस के पहले के आंकड़ों में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 575 बताई गई थी। इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल बताए गए हैं।

    पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, लापता विदेशियों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा प्रभावित इलाकों से 149 नेपाली पर्यटकों और 1,407 स्थानीय नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

    नेपाल में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। वहीं, तिब्बत में आपदा के वास्तविक प्रभाव और जनहानि को लेकर चीन की ओर से सीमित जानकारी सामने आने के कारण उसकी पारदर्शिता पर सवाल लगातार बने हुए हैं।

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