
नई दिल्ली. कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे को लेकर 24 घंटे का अल्टीमेटम (ultimatum) दिया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार शनिवार तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सीजेपी 2 अक्तूबर यानी गांधी जयंती से मुंबई में देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगी। इसके बाद आंदोलन को देश के अलग-अलग शहरों तक ले जाने की बात कही गई है। दीपके ने गांधी जयंती पर लोकतंत्र बचाने का संकल्प लेने की अपील भी की है।
सीजेपी ने यह घोषणा चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रही बहस के बीच की है। पार्टी ने ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। सीजेपी का दावा है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर किए गए हैं। पार्टी का आरोप है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ा है। ये आंकड़े और आरोप सीजेपी की ओर से लगाए गए दावे हैं।
ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा क्यों मांग रही है सीजेपी?
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। इससे पहले पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था। अब इसे घटाकर 24 घंटे कर दिया गया है। दीपके ने कहा कि अगर इस्तीफा नहीं हुआ तो 2 अक्तूबर को मुंबई से आंदोलन शुरू होगा और इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। पार्टी ने दिल्ली में आगे अनिश्चितकालीन धरने और ‘जंतर-मंतर 2.0’ की भी बात कही है।
एसआईआर में कितने नाम हटने का दावा किया गया?
सीजेपी ने कई राज्यों के आंकड़ों का हवाला देते हुए मतदाता सूची से नाम बाहर किए जाने का दावा किया है। पार्टी के अनुसार महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दो-दो करोड़ से अधिक नाम, कर्नाटक में करीब एक करोड़, तमिलनाडु में 97 लाख, पश्चिम बंगाल में 90 लाख, तेलंगाना में 73 लाख, दिल्ली में 47 लाख और केरल में 24 लाख नाम प्रभावित हुए हैं। दीपके का कहना है कि अगर लाखों-करोड़ों नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होते हैं तो चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हर नाम हटाने की प्रक्रिया कानूनी, पारदर्शी और समीक्षा योग्य है।
चुनाव आयोग के भीतर उठे सवालों का क्या मामला?
सीजेपी का विरोध ऐसे समय बढ़ा है, जब चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल उठने की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े कुछ मामलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
इसी को आधार बनाकर सीजेपी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि तीन सदस्यीय आयोग में आंतरिक चर्चा और अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
विपक्षी दलों से दीपके ने क्या अपील की?
दीपके ने विपक्षी दलों से भी कहा है कि अगर उन्हें लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, तो उन्हें ऐसे चुनावों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। उनका तर्क है कि चुनाव में भाग लेने से ऐसी प्रक्रिया को वैधता मिलने का संदेश जाता है।
उन्होंने विपक्षी दलों पर यह आरोप भी लगाया कि वे चुनावी गड़बड़ी का मुद्दा हर जगह एक समान तरीके से नहीं उठाते। दीपके ने कहा कि अगर किसी चुनाव में धांधली का आरोप है तो यह सवाल राज्य या राजनीतिक दल देखकर नहीं, बल्कि हर जगह समान रूप से उठाया जाना चाहिए।
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