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भारत में लोकल सर्वर पर चलेगा क्लाउड एआई, एंथ्रोपिक ने साझेदारी के साथ प्रशिक्षण और भारतीय भाषाओं पर बढ़ाया फोकस

August 05, 2026


नई दिल्ली । कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ArtificialIntelligence) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) ने भारत (India) के लिए अपनी नई रणनीति का ऐलान किया है। इस योजना के तहत कंपनी के क्लाउड (Cloud) एआई मॉडल अब भारत में मौजूद क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे संवेदनशील डाटा देश की सीमाओं के भीतर ही प्रोसेस होगा। इस कदम को भारत में एआई अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे डाटा सुरक्षा (DataSecurity), नियामकीय अनुपालन और स्थानीय तकनीकी विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था के तहत एआई मॉडल का संचालन भारतीय सर्वरों पर ही किया जाएगा। इसे इन-कंट्री इन्फेरेंस की व्यवस्था कहा जाता है, जिसमें उपयोगकर्ताओं का डाटा विदेश भेजने की आवश्यकता कम हो जाती है। इससे विशेष रूप से बैंकिंग, सरकारी विभागों, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय संस्थानों और अन्य विनियमित क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, जहां गोपनीय और संवेदनशील जानकारी के सुरक्षित उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। स्थानीय स्तर पर डाटा प्रोसेस होने से डाटा रेजिडेंसी से जुड़े नियमों का पालन करना भी अधिक आसान होगा।

कंपनी का कहना है कि भारत वैश्विक स्तर पर क्लाउड आधारित एआई सेवाओं के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। यही वजह है कि यहां एंटरप्राइज एआई समाधानों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और बढ़ते तकनीकी निवेश को देखते हुए कंपनी ने स्थानीय स्तर पर अपनी उपस्थिति और सेवाओं का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इससे देश के सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को आधुनिक एआई तकनीकों का लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।

एंथ्रोपिक ने अपने पार्टनर नेटवर्क को भी मजबूत करने की योजना बनाई है। कंपनी के अनुसार भारत से उसके पार्टनर नेटवर्क में सबसे अधिक पंजीकरण हुए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पांच हजार से अधिक पेशेवरों को एआई से जुड़ी विशेषज्ञता विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे देश में कुशल एआई पेशेवरों की संख्या बढ़ेगी और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होंगे। यह पहल स्टार्टअप, आईटी कंपनियों और डिजिटल सेवाओं से जुड़े संगठनों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में भारत में अपने कार्यबल का विस्तार किया जाएगा। साथ ही भारतीय भाषाओं में एआई मॉडल की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी स्थानीय भाषा में एआई आधारित सेवाओं का उपयोग कर सकें। इसके अलावा विभिन्न भारतीय संस्थानों और संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाकर एआई तकनीक को व्यावहारिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।


  • साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी एआई की भूमिका को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। एआई आधारित सुरक्षा परीक्षणों के माध्यम से संभावित कमजोरियों की पहचान, सॉफ्टवेयर की सुरक्षा जांच और डिजिटल प्रणालियों को अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जाएगा। वहीं डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं में भी इस तकनीक का उपयोग बढ़ाने की तैयारी है, जिससे डिजिटल पहचान, भुगतान प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी सुविधाओं को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत में सुरक्षित, भरोसेमंद और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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