
- ग्राम पंचायत कुलोन का मामला, ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार का आरोप
जबलपुर। जिले की ग्राम पंचायत कुलोन से जुड़े पिपरिया गांव में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में जिस सामुदायिक भवन को पूरी तरह निर्मित दिखाकर उसका भुगतान भी कर दिया गया, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मौके पर पहुंचने पर भवन आज भी अधूरा खड़ा मिला। यह दृश्य न केवल सरकारी दावों की पोल खोल रहा है, बल्कि निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से भवन निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी थी। जब उन्हें संदेह हुआ तो उन्होंने निर्माण कार्य और भुगतान से जुड़ी जानकारी जुटाई। जानकारी सामने आते ही ग्रामीण भी हैरान रह गए। दस्तावेजों में भवन का निर्माण पूर्ण दिखाया जा चुका था और संबंधित बिलों का भुगतान भी हो चुका था, जबकि वास्तविकता यह है कि भवन में कई महत्वपूर्ण कार्य अब तक अधूरे पड़े हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में सरपंच और पंचायत सचिव की मिलीभगत से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। उनका कहना है कि अधूरे निर्माण को पूरा बताकर सरकारी खजाने से भुगतान निकाल लिया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पंचायत स्तर पर सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला साबित हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन का निर्माण पूरा ही नहीं हुआ था, तो संबंधित विभाग के उपयंत्री, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्माण कार्य को पूर्ण कैसे मान लिया? आखिर किस आधार पर पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हुआ और करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये का भुगतान कैसे स्वीकृत कर दिया गया? क्या अधिकारियों ने बिना मौके का निरीक्षण किए ही कागजों पर हस्ताक्षर कर दिए, या फिर पूरे मामले में मिलीभगत से सरकारी नियमों को ताक पर रख दिया गया?
मौके की तस्वीरें साफ बता रही हैं कि भवन अभी भी अधूरा है। कहीं प्लास्टर का कार्य बाकी है तो कहीं फिनिशिंग और अन्य निर्माण कार्य अधूरे दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकारी फाइलों में भवन पूरी तरह तैयार दिखाया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाएं गांवों के विकास के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन यदि इसी तरह कागजों में विकास दिखाकर राशि निकाल ली जाएगी, तो गांवों का वास्तविक विकास कैसे होगा? लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, भुगतान की जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जबलपुर जिला प्रशासन इस कथित भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा? गांव के लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।