
नई दिल्ली । अमेरिका (America) के ह्यूस्टन (Houston) में फ्राइड चिकन (Fried Chicken) से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें एक कपल (Couple) ने लोकप्रिय फास्ट-फूड चेन पोपेय्स (Popeyes) के खिलाफ 12.5 करोड़ रुपये के हर्जाने का मुकदमा दायर किया है। कपल का आरोप है कि उन्होंने रेस्टोरेंट से फ्राइड चिकन ऑर्डर किया था, लेकिन चिकन के एक टुकड़े के भीतर उन्हें कंडोम जैसा दिखाई देने वाला सामान मिला। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चिकन के अंदर मिली वस्तु वास्तव में क्या थी।
जस्टिन हॉवर्ड और डेनियल मैककिनन ने इस मामले में 3 अगस्त को हैरिस काउंटी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में याचिका दायर की। घटना 25 जुलाई की बताई गई है। दोनों ने साउथ सैम ह्यूस्टन पार्कवे वेस्ट स्थित पोपेय्स आउटलेट से चिकन खरीदा था। हॉवर्ड के मुताबिक, चिकन का एक टुकड़ा काटने के दौरान उन्हें उसके अंदर ऐसी वस्तु दिखाई दी, जो उन्हें कंडोम जैसी लगी।
कपल का कहना है कि इस वस्तु को देखने के बाद उन्होंने खाना तुरंत बंद कर दिया। उनके अनुसार, घटना के बाद दोनों को उल्टी जैसा महसूस होने लगा और उन्हें चिंता हुई कि कहीं उन्होंने दूषित या असुरक्षित भोजन तो नहीं खा लिया। उनका कहना है कि उस समय यह पता लगाना संभव नहीं था कि चिकन में मिली वस्तु क्या थी, वह वहां कितनी देर से मौजूद थी और ऑर्डर के दूसरे हिस्से भी प्रभावित हुए थे या नहीं।
दायर मुकदमे में पोपेय्स की पैरेंट कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स इंटरनेशनल, पोपेय्स लुइसियाना किचन और फ्रेंचाइजी संचालक आमाना बिजनेसेज को प्रतिवादी बनाया गया है। कपल ने आरोप लगाया है कि मामले में लापरवाही बरती गई और भोजन की सुरक्षा तथा उचित खाद्य प्रबंधन से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया।
याचिका में टेक्सास के उपभोक्ता संरक्षण कानून के उल्लंघन सहित कई आरोप लगाए गए हैं। कपल ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद जब वे शिकायत लेकर उसी आउटलेट पर पहुंचे तो उनकी समस्या को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया। उनके मुताबिक, कर्मचारियों ने शिकायत के समाधान के तौर पर चिकन बदलकर नया ऑर्डर देने की कोशिश की, जबकि वे रिफंड और घटना की उचित जांच चाहते थे।
कपल के अनुसार, काफी आग्रह के बाद उन्हें उनके पैसे वापस किए गए। इसके बाद मामला स्थानीय समुदाय के कुछ कार्यकर्ताओं तक भी पहुंचा। जुलाई के अंतिम दिनों में कैंडिस मैथ्यूज और क्वानेल एक्स नामक कम्युनिटी एक्टिविस्ट आउटलेट के प्रबंधन से मिलने पहुंचे और मामले की जांच की मांग की।
कार्यकर्ताओं की ओर से यह मांग भी रखी गई कि जब तक घटना की जांच पूरी न हो जाए, संबंधित आउटलेट पर चिकन की बिक्री रोकने पर विचार किया जाए। इस मामले ने भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और ग्राहकों की शिकायतों पर रेस्टोरेंट प्रबंधन की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल मुकदमे में लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अदालत में इनकी जांच तथा सुनवाई होनी है। चिकन के भीतर मिली संदिग्ध वस्तु की वास्तविक पहचान और वह भोजन में किस तरह पहुंची, यह भी मामले की जांच के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल है। 12.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग के साथ दायर यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ेगा।
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