नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान के लारक आइलैंड पर अमेरिकी मिसाइल (American missile) हमले और इसके जवाब में ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। सैन्य टकराव की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.12 डॉलर यानी 2.41 फीसदी चढ़कर 90.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 1.80 डॉलर यानी 2.16 फीसदी की तेजी के साथ 85.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्रूड की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित ईरान के लारक आइलैंड पर मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया। जुलाई के बाद ईरान पर अमेरिका की ओर से यह पहला सैन्य हमला बताया जा रहा है।
इसके बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी एयरबेस पर हमले का दावा किया। दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव ने बाजार में एक बार फिर यह चिंता पैदा कर दी है कि आने वाले दिनों में वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
तेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है। दुनिया की करीब एक-पांचवीं तेल जरूरत का हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। हमलों के खतरे के बीच रविवार और सोमवार को इस रूट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर रोजाना करीब 5 रह गई।
इससे पहले शनिवार को इसी समुद्री मार्ग पर एक क्रूड टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। लगातार बढ़ते खतरे के कारण कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां इस रूट पर अपने जहाजों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं।
तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला के साथ हुए हालिया समझौते से मिलने वाले क्रूड ऑयल का इस्तेमाल अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को फिर से भरने में किया जाएगा।
अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार फिलहाल करीब 44 साल के निचले स्तर पर बताया जा रहा है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से अमेरिकी प्रशासन की चिंता भी बढ़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है।
सोमवार सुबह भी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहा।
हालांकि, अगर अमेरिका-ईरान तनाव लंबा खिंचता है और इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय ईंधन बाजार पर भी नजर रहेगी।
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