
नई दिल्ली । उत्तराखंड (Uttarakhand) में सरकारी डिजिटल सेवाओं पर एक बार फिर साइबर सुरक्षा (Cyber Security) से जुड़ी चुनौती सामने आई है। शनिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष (Chief Minister Relief Fund) सहित राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों की वेबसाइटें मालवेयर (Malware) आधारित साइबर हमले (Cyber Attack) की चपेट में आ गईं। घटना के बाद संबंधित वेबसाइटों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोकना पड़ा, ताकि किसी प्रकार की अतिरिक्त तकनीकी क्षति या डाटा से छेड़छाड़ की आशंका को रोका जा सके। सूचना मिलते ही साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अभियान शुरू किया।
देहरादून स्थित तकनीकी अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में पाया कि कई सरकारी वेबसाइटों पर संदिग्ध मालवेयर गतिविधि दर्ज की गई थी। इसके बाद प्रभावित पोर्टलों को नेटवर्क से अलग कर उनकी सुरक्षा जांच शुरू की गई। पहले से सुरक्षित रखे गए बैकअप की सहायता से तकनीकी टीम ने कई घंटे की लगातार मेहनत के बाद अधिकांश वेबसाइटों का संचालन दोबारा शुरू कर दिया। हालांकि मुख्यमंत्री राहत कोष की वेबसाइट समाचार लिखे जाने तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी और उसे बहाल करने का कार्य जारी था।
साइबर हमले की चपेट में मुख्यमंत्री राहत कोष के अलावा लोक निर्माण विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण, राज्य कर विभाग, ईएसआईसी, परिवहन विभाग और पर्यटन विभाग सहित कुल 10 विभागों की वेबसाइटें प्रभावित हुईं। ये सभी पोर्टल नागरिक सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए ऑनलाइन सेवाओं के प्रभावित होने से विभागों को वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से कार्य करना पड़ा।
तकनीकी जांच के दौरान यह भी संभावना जताई गई कि हमले में इस्तेमाल किया गया मालवेयर विदेशी स्रोत से जुड़ा हो सकता है। शुरुआती स्तर पर इसके रूस से जुड़े होने की आशंका व्यक्त की गई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। विशेषज्ञ मालवेयर के स्रोत, उसकी कार्यप्रणाली और संभावित प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही हमले की वास्तविक प्रकृति और जिम्मेदार पक्षों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2024 में उत्तराखंड ने बड़े साइबर हमले का सामना किया था। उस समय मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित लगभग 90 सरकारी वेबसाइटें कई दिनों तक प्रभावित रही थीं। उस घटना के बाद राज्य सरकार ने डाटा बैकअप, सर्वर सुरक्षा और साइबर निगरानी से जुड़े कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए थे। माना जा रहा है कि उन्हीं व्यवस्थाओं की वजह से इस बार वेबसाइटों को अपेक्षाकृत कम समय में दोबारा सक्रिय किया जा सका और संभावित नुकसान सीमित रहा।
साइबर सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध मालवेयर की समय रहते पहचान कर ली गई थी, जिसके कारण उसे अधिक फैलने का अवसर नहीं मिला। प्रभावित सिस्टम को अलग करने, बैकअप से डाटा पुनर्स्थापित करने और सुरक्षा जांच पूरी करने के बाद अधिकांश वेबसाइटों को सुरक्षित रूप से दोबारा चालू कर दिया गया। फिलहाल सभी सरकारी पोर्टलों की निगरानी बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार के साइबर हमलों से सरकारी डिजिटल सेवाओं और नागरिकों के डाटा की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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