
उज्जैन। इन दिनों दूध पीने से कई समस्याएँ हो रही हैं और इसका बड़ा कारण यह है कि मिलावटी दूध बिक रहा है जिसके कारण लोगों को कई प्रकार की शारीरिक तकलीफें हो रही हैं। दूध के उत्पादन में केमिकल का उपयोग किया जा रहा है और दुधारू पशुओं को इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।
उज्जैन शहर में आबादी 8 लाख के करीब पहुँच गई है और इस मान से दूध की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। प्रतिदिन शहर में लाखों लीटर दूध की खपत होती है और आपूर्ति करने के लिए नकली और मिलावटी दूध भी शहर में खपाया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक शहर में प्रतिदिन ढाई से 3 लाख लीटर दूध की खपत हो रही है। दूध की अधिकांश आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्रों से होती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जाँच नहीं होती। पशु पालकों द्वारा अधिक दूध के उत्पादन के लिए पशुओं को इंजेक्शन देते हैं और इस दूध के सेवन से लोग कई प्रकार की शारीरिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि मिलावटी दूध के सेवन से लोगों को पाचन समस्या, थकान, नींद नहीं आना एवं शुगर बढऩे जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि ढाई लाख लीटर दूध घरों में ही खप जाता है। अगर उज्जैन शहर की 2 हजार से अधिक छोटी-बड़ी चाय की दुकानें और होटलें इसमें जोड़ दी जाए तो यह आंकड़ा 7 से 8 लाख लीटर दूध की प्रतिदिन की खपत तक पहुँच रहा है। यही कारण है कि सरकार भी दूध उत्पादन को बढ़ाने के प्रयास कर रही है।
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