
नई दिल्ली। नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose)की 129 वीं जयंती (129th birth anniversary)के अवसर पर अंडमान-निकोबार द्वीप (Andaman and Nicobar Islands)समूह का नाम बदलने का प्रस्ताव सामने (proposal putforward)आया है। पूर्व सांसद और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता (Chairperson K. Kavitha)ने पीएम मोदी को पत्र लिखते हुए इस बात की सिफारिश की है कि इस द्वीप समूह का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी वीर सेना के सम्मान में ‘आजाद हिंद’ रखा जाए।
प्रस्ताव के पक्ष में तर्क देते हुए कविता ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आजाद हिंद की उस अंतरिम सरकार की विरासत का सम्मान करना है, जिसने 1943 में इन द्वीपों को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता से मुक्त कराया था। यही क्षेत्र सबसे पहला भारतीय क्षेत्र बना था, जो आजाद हुआ था।
पीएम कार्यालय को लिखे अपने पत्र में कविता ने कहा कि पिछले कुछ सालों में सरकार ने आजाद हिंद सेना और नेताजी सुभाष का सम्मान किया है। सरकार ने यहां के तीन द्वीपों का नाम भी बदला गया है, लेकिन अभी भी पूरे द्वीप समूह का नाम औपनिवेशक सत्ता के दौरान रखा गया ही है।
उन्होंने केंद्र सरकार से नाम परिवर्तन को प्रभावी बनाने के लिए संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू करने का आग्रह किया। एनडीटीवी से इस मुद्दे पर बात करते हुए पूर्व सांसद ने कहा, “आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती है। वे ही थे जो देश से बाहर गए और अपनी कूटनीति से जापान से समर्थन मांगा। उन्होंने बलपूर्वक अंग्रेजों से पूरा अंडमान और निकोबार छीन लिया।”
कविता ने कहा, “उन्होंने इसका नाम आजाद हिंद रखा और 1947 से बहुत पहले ही वहां हमारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। यह एक राष्ट्रीय स्मृति है। इसे बहुत पहले ही सम्मानित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं प्रधानमंत्री को पत्र लिख रही हूं। भाजपा ने कई नाम बदले हैं, मैं उन सभी से सहमत नहीं हूं, लेकिन नेताजी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं, एक ऐसी ऊर्जा हैं। अंडमान और निकोबार नाम अंग्रेजों ने दिया था, हमने नहीं। इसलिए इसका नाम आज़ाद हिंद होना चाहिए।”
आपको बता दें, केंद्र की मोदी सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में अंडमान निकोबार द्वीप समूहों के तीन द्वीपों का नाम बदल दिया था। रॉस द्वीप का नाम अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस है, नील द्वीप का नाम अब शहीद द्वीप है, जबकि हेवलॉक द्वीप का नाम अब स्वराज द्वीप है। यह नाम पोर्ट ब्लेयर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ को याद करते हुए बदले गए थे।
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